जंगल में मंगल

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हेल्लो दोस्तों ,मेरा नाम पंकज है.और मई मीरट का रहेने वाला हु .हमारे परिवार में मई और मेरी बेहेन उषा और मेरी पापा और मम्मी है . मेरी बेहेन की (उषा उम्र २६ वर्ष) एक अच्छी सहेली (काजल उम्र 30 वर्ष)  है जो हमारे ही कालोनी में कुछ दूर अपने खुद के घर में रहती है, काजल उम्र में उषा से बड़ी थी ,और वोह शादीशुदा भी था ,पर उसका कोई बच्चा नहीं था.मेरी बेहेन और काजल दोनों एक ही ऑफिस में नौकरी करती है दोनों में खूब जमती है एक दूसरे के घर भी खूब आना जाना है ! उषा प्रति रविवार को बड़ी सब्जी मंडी कार से सब्जी लेने जाते है और एक सप्ताह की सब्जी लेकर रख लेते है ये बात काजल को जब पता चली तो वोह भी हमारे कार में चलने लगी सब्जी लेने के लिए ! चुकि काजल के पति टूरिंग जॉब में है इस लिए उनका, महीने में ज्यादातर दिन तो बाहर ही निकल जाता है ! गृहस्थी का सारा साजो सामान काजल को ही जुटाना पड़ता है ! मैं काजल से ज्यादातर कम ही बातें किया करता था,पर काजल का मेरे घर आना जाना खूब लगा रहता है ! काजल एक बहुत ही खूबसूरत महिला है इस लिए शीतल की नजरें भी मेरे ऊपर सतर्क रहती है !

मैं एक दुकान संभालता हु ,दुकान काफी बढ़ा है इसीलिए मई सुबह शाम जा के पैसा कलेक्ट करके आजाता हु ! मेरी उम्र करीब 27 साल है .सब्जी लेने जाते जाते काजल धीरे धीरे मेरे साथ घुल मिलने लगी , बातें करने लगी खासकर उस समय जब उषा पास में नहीं होती,कभी कभी मई ही उसको मेरी गाड़ी से उसके घर तक छोड़ने चला जाता हु ! सब्जी मंडी में कई बार काजल का सब्जी का झोला सम्हालने में मदद करता | इस तरह से हर रविवार को सब्जी लेने जाते जाते करीब कुछ 2  महीने हो गए एक बार सब्जी मंडी में बहुत अधिक भीड़ थी उस भीड़ में एक दो बार काजल की चूचियाँ मेरे बाह से टकरा गई तो मैंने काजल की तरफ देखा और सरमा गया .पर काजल के होठो में एक सरारती मुस्कान दिखी जिसका मतलब मैं उस समय पर समझ नहीं पाया ! सब्जी मंडी में कई बार ऐसा हुआ की सब्जी का झोला भर गया तो काजल मेरे साथ सब्जी झोला रखने चल देती और लौटते समय मेरे साथ ही सब्जी मंडी में घूमती क्योकि भीड़ में उषा को ढुढते ढुढते समय लग जाता तब तक काजल मेरे साथ ही घूमती इस दौरान कई बार काजल मेरे से अपनी चुचिया घिसते हुए पीठ चिपक जाती !

एक सुबह को पीछे की सीट पर सामान रखते समय मैंने काजल को किस कर लिया और चूची को दबा दिया तो काजल इधर उधर देखी और बोली ” क्या कर रहें है आप कोई देख लेगा तो क्या होगा ”  मैं समझ गया यदि कोई नहीं देखे तो चलेगा ! अब हर दुसरे दिन काजल जल्दी ही सब्जी का झोला रखने चल देती तो हम दोनों पीछे की सीट में बैठ जाते और उषा आने तक एक दूसरे को किस करते थे मैंने काजल के ब्लाउज के नीचे से हाथ डालकर चूचियों को खिला लेता ! काजल की चूचियाँ एक दम से बढ़िया टाइट और सुडौल है , ज़रा सा भी नहीं लटकी हुई है ! काजल पूरी तरह से मेरे काबू में आचुकी थी बस चुदाई का मौका तलास रहा था और ओ मौका एक दिन मिल गया ! उसदिन रबिबर था उसदिन को क्या हुआ की उषा की तबियत ठीक नहीं थी तो उषा बोली -आज आप अकेले चले जाओ और सब्जी ले आओ,मेरी तबियत टीक नहीं है. तब मैंने कहा -टीक है मैं चला जाऊँगा पर काजल को नहीं ले जाऊँगा. तब उषा बोली -क्यों काजल आपके ऊपर बैठ कर जाएगी या उसके जाने से पेट्रोल ज्यादा लगेगा. तब मैंने कहा – तुम्हारे साथ उसका जाना अच्छा लगता है पर मेरे साथ जाएगी तो लोग क्या कहेंगे. तो उषा बोली ” जिस दिन लोगो को सुनने की परवाह किया उस दिन जीना दूभर हो जाएगा और आज की तो बात है”.तब मैंने कहा -ठीक है. जबकि मैं नौटंकी करने के लिए ये सब कह रहा था ! मैं जल्दी जल्दी तैयार हो रहा था की इतने में काजल का फोन आया ओ आने के लिए पूछ रही थी तो मई ने कह दिया तूम तैयार रह मई आ रही हु ! और मैं जल्दी से तैयार होकर काजल के घर के सामने पहुंच गया उस समय सुबह के 9  बजकर ३० मिनट हो रहे थे. मैं जैसे ही पहुंचा काजल कार देखकर झट से जल्दी जल्दी सीढ़ी उत्तर रही थी तब मैं जल्दी से काजल के पास पहुंचा और बोला ”अभी तक तैयार नहीं हुई क्या” तो काजल  बोली ”आप कैसे ? उषा कहाँ है ? ” तब मैंने काजल को बांहों में भरते हुए किस करते हुए बोला ”आज उषा की तबियत टीक नहीं हम दोनों ही चलेंगे” तो काजल मुझे किस किया और बोली ”ओके” और फिर जल्दी से कमरे के अंदर घुस गई और कपडे बदलने लगी तो मैं भी पहुंच गया कमरे के सामने पर वंदना ने अंदर से लाक किया हुआ था दरवाजा !

जब मैंने दरवाजा खटखटाया तो बोली ” रुकिए कपडे पहन लू फिर आती हु” तब मैंने कहा ”दरवाजा तो खोलो” तो बोली ” नहीं ” मैंने कई बार कहा पर नहीं मानी और जल्दी ही कमरे से साड़ी पहन कर निकली जबकि हमेसा ही सलवार सूट पहन कर जाती थी सब्जी मंडी ! साड़ी में देखकर मैंने बोला ”वाउ क्या मस्त लगती हो साड़ी ,में” तो कुछ नहीं बोली बस मुस्कुरा कर रह गई और फिर बोली ”चलिए”  .मैंने कहा ”आगे आ जाओ न” तो अंजलि ने पीछे का दरवाजा बंद करके आगे की सीट में बैठ गई और दोनों कार से चल दिए और रास्ते में मैंने काजल से अपनी मंसा को बताया तो वंदना बोली ” छिः कितने गंदे हो आप कार में भला कैसे बनेगा” तब मैंने काजल को पूरा प्लान बताया. तो काजल  कुछ नहीं बोली ,काजल की चुप्पी को मैंने मौन सहमति समझी और जल्दी जल्दी कार चला कर 15 मिनट में मंडी पहुंच गए और जल्दी जल्दी सब्जी लिया तब तक 9  बजकर 45 मिनट हुए थे ! जबकि हम अन्य दिनों में सब्जी लेकर 9:45 -10 बजे तक घर पहुँचते थे ! इस तरह से हमारे पास करीब करीब 50 मिनट का समय था !

मैंने कार को शहर से बाहर के सुनसान जगह पर जाने के लिए घुमा दिया तो अंजलि बोली ” इधर कहाँ जा रहे है ” तब मैंने कहा की ” वही जहाँ के लिए बोला था” तो काजल फिर से बोली ”क्या पागलपन है” तो मैंने कहा ”ये काम होते ही है पागलपन वाले” तो मुस्कुराने लगी तो मैं समझ गया की अंजलि भी चुदाने के लिए बेताब है ! और जल्दी जल्दी कार को चलाकर शहर से करीब 9 किमी बाहर एकसुनसान गली में कार को घुसा दिया जो बिलकुल भी सुनसान थी और चारो तरफ से झाड़ियाँ थी .

अब पूरा कहानी काजल के मु से ही सुन लीजिये की क्या हुआ था .काजल ,”उस ने मेरे गाल पर चुम्बन लिया तो मैं अपना आपा खोने लगी. मैंने भी उस के गाल को चूमा. गाडी चलते हुए उस ने मेरी चुचियों को दबाया. मैं जो चाहती थी, वो हो रहा था. उस ने फिर एक बार मेरी चुचियों को दबाया और मसला, इस बार जरा जोर से. चलती गाडी में जितना संभव था, उतना मैं उस से चिपक गई. अब मेरी चूचियां उस के हाथ पर रगड़ खा रही थी. मैंने उस के शर्ट के ऊपर का बटन खोल दिया. मेरी उँगलियाँ उस की चौड़ी, बालों भरी छाती पर, उस की मर्दाना निप्पल पर घूमने लगी. मैंने महसूस किया की उसकी निप्पल मेरे सेक्सी तरीके के कारण कड़क हो गई थी. मैंने एक के बाद एक, उसकी दोनों निप्पलों को मसला तो उसको मज़ा आया. मैंने नीचे देखा तो पाया की उस की पेंट के नीचे हलचल हो रही थी. मैंने मुस्कराते हुए उस की निप्पल को छोड़ कर अपना हाथ नीचे ले गई. मेरा एक हाथ उस की गर्दन के पीछे था और मेरी चूचियां अभी भी उसके हाथ पर रगड़ खा रही थी. मेरा दूसरा हाथ उस की पेंट के ऊपर, उसके तने हुए लंड पर था. उस ने अपने परों की पोजीसन ऐसी बना ली की वो कार चलता रहे और मैं उस के लौड़े से खेलती रहूँ. मैं उस का खड़ा हुआ लंड मसल रही थी और उस को बाहर निकालना चाहती थी. मैंने उस की जिप खोली तो उस ने भी अपने खड़े हुए लंड को चड्डी से बाहर निकालने में मेरी मदद की.

 

कितना सुन्दर लंड है मेरे प्रेमी का. गहरे भूरे रंग का, करीब 9  इंच लम्बा, 3 इंच मोटा और कड़क लंड. गरम, शख्त और मज़बूत. उस के लंड के सुपाड़े पर चमड़ी है और और सुपाड़े पर छेद बहुत प्यारा लगता है. मुझे हमेश ही उसके मर्दानगी भरे लंड को देखना अच्छा लगता है. मैं बहुत भग्यशाली हूँ की मुझे ऐसा प्रेमी मिला है जो मेरी तरह हमेशा, कहीं भी, कभी भी, प्यार और चुदाई का खेल खेलने को तैयार रहता है. उस लंड की ऊपर की चमड़ी बहुत आसानी से नीचे हो जाती है, जब मैं उस के खड़े लंड को पकड़ कर नीचे दबाती हूँ. उस का गुलाबी सुपाडा मेरी आँखों के सामने आ जाता है. उस के लंड के सुपाड़े पर, छेद पर पानी की एक बूँद आ गई थी जो की आप जानतें है ये चुदाई के पहले का पानी है. उस ने भी कार चलते हुए मेरी चूत पर मेरी साड़ी के ऊपर से ही हाथ फिराया जिस से मेरी गर्मी बढ़ने लगी और हमेश की तरह मेरी चूत ने भी रस निकालना चालू कर दिया. मुझे पता है की पंकज का कार चलाने पर बहुत अच्छा नियंत्रण होता है और वो कार चलाने में बहुत ही माहिर है. इसलिए मैं चलती कार में उसके साथ चुदाई का खेल खेलते समय चिंता नहीं करती जब वो कार चला रहा होता है.

मैंने धीरे से उस के खड़े लंड को पकड़ कर हिलाया, मेरे छूने से उस का कड़क लौड़ा और भी सख्त हो गया.और हम चलती कार में हमारा पसंदीदा काम करने लगे. मैंने पंकज की आँखों में देखा तो उन में मेरे लिए प्यार के सिवाय कुछ और नहीं था. मैंने उस के लंड को पकड़ कर ऊपर नीचे करना शुरू किया. कुछ समय बाद मैंने अपना सिर नीचे करके उस के तनतनाते हुए लंड को अपने मुंह में लिया. मैं अपनी जीभ उस के लंड मुंड पर घुमा कर उस के पानी का स्वाद लिया. उस का लंड चूसते हुए भी, चलती कार में मेरा मुठ मारना लगातार चालू था. मुझे पक्का था की कोई भी बाहर से नहीं देख सकता था की अन्दर चलती कार में हम क्या कर रहें है. कार के शीशे गहरे रंग के थे. कार की छोटी जगह में झुक कर उस के लंड को चूसने में तकलीफ हो रही थी क्यों की हिलने जगह बहुत ही कम थी. उस ने भी इस बात को समझा और मैं सीधी हो कर बैठ गई. उस ने फिर मेरी चुचियों को मसला और दबाया, मेरी चूत पर हाथ फिराया. मैंने बैठे बैठे उस के लंड को कस कर पकड़ा और शुरू हो गई जोर जोर से मुठ मारने का काम करने को. वो भी बार बार मेरी चुचियों से खेल रहा था, दबा रहा था, मसल रहा था और मेरी चूत पर भी हाथ फिरा रहा था. चुदाई की, सेक्स की गर्मी बढती गई. हम दोनों को ही मज़ा आ रहा था. मैं सोच रही थी की उस के लंड का पानी जब निकलेगा, तब कार में, उस के कपड़ों पर फ़ैल जाएगा. मुझे पता है की उस का लंड, बहुत दूर तक, बहुत तेजी से और बहुत सारा पानी निकालता है. मैं अपना मुठ मारने का काम कर रही थी और उस ने कार में पड़ा छोटा तौलिया अपने हाथ में ले लिया. मैं समझ चुकी थी की ये लंड से निकलने वाले पानी को फैलने से रोकने के लिए है. वो कार चला रहा था और मैं उस के लंड पर मुठ मार रही थी. मुठ मारते मारते मैंने उस के लंड में और ज्यादा शाख्ती महसूस की तो मुझे पता चल गया की उस का पानी निकलने वाला है. एक हाथ से वो ड्राइव कर रहा था और एक हाथ में अपने लंड के पास तौलिया पकड़े हुए था.

अचनक उसके मुंह से निकला “ऊऊह     काआआअर jaaaaलल ” और उसने तौलिया अपने लंड के मुंह पर रखा. मैंने जल्दी से तौलिया पकड़ कर उस के लंड पर लपेट दिया और फिर से उस के लंड को तौलिये के ऊपर से पकड़ लिया. उस का लंड पानी छोड़ने लगा जो तौलिये में जमा होता जा रहा था. पानी निकालते हुए उस का लंड मेरे हाथ में नाच रहा था. मैं उस के लंड को टाईट पकड़े रही. उस के चेहरे पर संतोष के भाव थे और मैं खुस थी की मैंने अच्छी तरह से मुठ मार कर उस के लंड को शांत किया था. मैंने तौलिये से उस के लंड को साफ़ किया और फिर उसने अपने लंड के पानी से भीगा हुआ तौलिया चलती कार से बाहर गीली सड़क पर, थोड़ी से खिड़की खोल कर फ़ेंक दिया. जब उसने खिड़की खोली थी तो पानी की कुछ बूँदें अन्दर आई, हमें अच्छा लगा. उस का लंड अभी भी आधा खड़ा, आधा बैठा था. न ज्यादा कड़क, न ज्यादा नरम. आप जानतें है की हमेशा ही खड़े लंड को थोड़ी कोशिश के बाद चड्डी और पेंट से बाहर निकाला जा सकता है, पर खड़े लंड को वापस चड्डी और पेंट में डालना मुश्किल है. नरम लंड को आसानी से वापस कपड़ों के अन्दर डाला जा सकता है. उस ने वापस अपना नरम लंड अपनी जिप के अन्दर, पेंट में, चड्डी में डाल लिया.

करीब 10  हो चुके थे और हम सब्जी मंडी से करीब 15 KM दूर थे. मैं मान गई कार में चुदवाने को क्यों की मैंने कभी कार में नहीं चुदवाया था. भी कार में चुदवाने का अनुभव लेना चाहती थी. मुझे हमेशा अलग अलग पोजीसन में, अलग अलग जगह में चुदवाने में बहुत मज़ा आता है. मैंने उस से पूछा की कैसे हम हाइवे पर कार में चुदाई कर सकतें है तो उसने मुस्करा कर जवाब दिया ”तुम खली मुझे साथ दो काजल मई तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हु .” मैं उसकी बात सुन कर हंस पड़ी.

कोई 2 / 3 किमी आगे आने के बाद उस ने कार हाइवे से नीचे उतार कर पेड़ों के झुण्ड की तरफ बधाई. आखिर उस ने कार वहां खड़ी की जहाँ चारों तरफ घने पेड़ थे. मैंने देखा की हमारी कार दो बड़े पेड़ों के बीच खड़ी थी. हम हाइवे से ज्यादा दूर भी नहीं थे. उसने अपनी पेंट और चड्डी उतार कर पिछली सीट पर फ़ेंक दी. अब केवल वो अपनी शर्ट पहने हुए था. मैंने देखा की उस का लंड धीरे धीरे खड़ा हो रहा था जैसे उस में हवा भरी जा रही थी. उसका लंड लम्बा होता जा रहा था, मोटा होता जा रहा था और ऊपर की और उठ रहा था. मैंने भी अपनी साड़ी और पंटी उतार कर पिछली सीट पर उस के कपड़ों पर फ़ेंक दिए. अब मैं भी ऊपर केवल अपना ब्लाउज पहने हुए थी और नीचे से हम दोनों नंगे थे. उसने कार की ड्राइविंग सीट भी पीछे करदी ताकि थोड़ी और जगह हो जाए. मेरा बहुत मन हो रहा था की वो मेरी चुचियों को चूसे, पर मैं समझ रही थी की हम किसी बंद कमरे में नहीं है. और मैं अपनी चूत, अपनी गांड और अपनी चूचियां किसी और को नहीं दिखाना चाहती थी.

उस ने शायद मेरी आँखों को पढ़ लिया था. वो बोला – ” काजल ! एक काम करो. मैं जिस तरह चुदाई करने की सोच रहा हूँ, उस में मैं तुम्हारी चूचियां चोदते वक़्त नहीं चूस पाऊँगा. पर मैं तुम को चुदाई का पूरा पूरा मज़ा देना चाहता हूँ और साथ ही खुद भी पूरा मज़ा लेना चाहता हूँ. तुम अपनी ब्रा का हुक खोल लो और अपने ब्लाउज के नीचे के दो बटन भी खोल लो. इस तरह तुम्हारी चूचियां नंगी भी रहेगे और ढकी हुई भी रहेंगी. मौके का फायदा उठा लेंगे. ”

मैं उस की बात सुन कर खुस हो गई. हम दोनों ही जानते है की चुदवाते समय मुझे अपनी चूचियां और निप्पल चुस्वाना बहुत पसंद है. मैंने वैसा ही किया जैसा उस ने कहा. मेरी चूचियां अब मेरे ब्लाउज के नीचे से चुसवाने को तैयार थी.

अब टक उसका गरम लंड पूरी तरह तन कर चूत से मिलने को तैयार हो गया था. मैं जानती थी की मेरी चुदाई बहुत देर टक होने वाली है क्यों की पंकज भी चुदाई के मामले में बहुत मज़बूत है और बहुत देर चोदने के बाद उस के लंड का पानी निकलता है. और ऊपर से मैंने अभी कुछ देर पहले मुठ मार कर एक बार उसके लंड रस को निकाल दिया था तो और भी ज्यादा वक़्त टक चोदने वाला है मुझे.

खैर, अब वक़्त आ गया था असली चुदाई का. मैंने उस के खड़े हुए लंड को पकड़ा तो वो हमेशा की तरह बहुत गरम था. मैं बहुत भाग्यशाली हूँ की मेरे प्रेमी का लौड़ा इतना मज़बूत, इतना लम्बा, इतना मोटा और इतना गरम है. मैं तो कहती हूँ की ये लौड़ा नहीं, चोदने की मशीन है. चुदाई की शुरुआत हमने हूथों के चुम्बन से की. हम एक दुसरे के गरम, रसीले होंठ चूसने लगे. होठों के चुम्बन से चुदाई की आग और भी भड़क गई. उस ने मुझे अपने ऊपर खींच तो मेरे हाथ उस की गर्दन के पीछे और उस के हाथ मेरी गोल गोल, कड़क गांड पर फिरने लगे. मेरी चूत में खुजली होने लगी और वो गीली होने लगी. वो मेरी गंद दबा रहा था और अपनी उँगलियाँ मेरी गांड की गोलियों के बीच की दरार में घुमा रहा था. मैं और भी गरम होने लगी.

पंकज ये अच्छी तरह जानता है की कम समय में मुझे कैसे गरम किया जाता है और वो वही काम एक बार फिर कर रहा था. मेरी जीभ को अपने मुंह में ले कर उसने आइस क्रीम की तरह चूसा, चुभलाया. उस के हाथ लगातार मेरी नंगी गांड पर घूम रहे थे. उसकी उन्ग्की मेरी गांड पर घुमती हुई थोड़ी से मेरी गांड में घुसी तो मैं उछल पड़ी. जब उस ने अपनी ऊँगली मेरी गांड में अन्दर बहर हिलाई तो मज़ा ही आ गया. हाइवे पर गाड़ियाँ आ जा रही थी और कोई भी हम को देख नहीं सकता था. हमारी कार पेड़ों के बीच में थी और हम दो जवान प्रेमी उसमे चुदाई का मज़ा ले रहे थे, बिना किसी की नज़र में आये. आप जानतें है की इस से पहले मैंने कई बार चलती हुई कार में अपने हाथ और मुंह का कमाल उसके लंड पर दिखाया था, बिना किसी की नज़र में आये और ये पहला मौका था जब हम पूरी चुदाई कार में करने वाले थे, उसी तरह, बिना नज़र में आये. मैंने उस का तना हुआ, चुदाई के लिए तैयार लंड पकड़ कर उसके मुंह की चमड़ी नीचे की तो उसके लौड़े का गुलाबी सुपाडा बाहर आ कर चमक उठा.

हमने चुम्बन ख़तम किया और मैं अपनी सीट पर बैठ कर लम्बी लम्बी साँसे लगी. उस  के हाथ पकड़ कर मैंने उनको अपनी चुचियों पर रखा तो वो मेरी चुचियों को मेरे टॉप के ऊपर से दबाने लगा. उस का लंड अभी भी मेरी पकड़ में था. उस ने अपना मुंह मेरी चुचियों टक लाने के लिए अपनी पोजीसन बदली और मेरे टॉप के नीचे का भाग ऊपर किया तो मेरी तनी हुई दोनों सेक्सी चूचियां उस के चेहरे के सामने थी. मेरी गहरे भूरे रंग की निप्पल तन कर खड़ी थी, एक निप्पल को उस ने अपने मुंह में लिया और दूसरी को अपनी उँगलियों के बीच में. मेरी एक निप्पल को किसी भूखे बच्चे को तरह चूस रहा था और दूसरी निप्पल को किसी शैतान बच्चे की तरह मसल रहा था. मेरी फुद्दी अब टक पूरी गीली हो चुकी थी और उस में चुदवाने के लिए खुजली हो रही थी. इस पोजीसन में मैं उस के लौड़े को देख नहीं पा रही थी पर वो अभी भी मेरे हाथ में था और मैंने उस को भी थोड़ा पानी छोड़ते हुए महसूस किया. यानि वो भी मेरी चूत में घुसने के लिए मरा जा रहा था. हम अपने अलग ही, चुदाई के संसार में थे और हमारा पूरा धयान चुदाई पर ही था, हम चुदाई में ही मगन थे. उस ने मेरी दूसरी चूची को चूसने के लिए फिर अपनी पोजीसन बदली. जो निप्पल पहले मसली जा रही थी वो अब चुसी जा रही थी और जो पहले चुसी जा चुकी थी वो अब मसली जा रही थी. उस छोटी सी कार में चुदाई का तूफ़ान उठ रहा था और बाहर बरसात हो रही थी. किसी को पता नहीं था की वहां एक कार है और कार में हम चुदी चुदी खेल रहे थे.

उस का एक हाथ मेरे पैरों के जोड़ की तरफ बढ़ा तो मैंने अपने पैर थोड़े चौड़े कर लिए ताकि वो मेरी सफाचट, चिकनी चूत पर आराम से हाथ फिरा सके. हात फिराते फिराते उस की बीच की ऊँगली मेरी गीली फुद्दी के बीच की दरार में घुस गई. वो अपनी ऊँगली मेरी चूत के बीच में ऊपर नीचे मेरी चूत के दाने को मसलता हुआ घुमा रहा था. चूची चुसवाने से और चूत में ऊँगली करवाने से मेरे मुंह से सेक्सी आवाजें निकलने लगी. उस के मुंह में मेरी निप्पल और मेरे हाथ में उस का लंड, दोनों और कड़क हो गए. मैं भी उस का लंड चुसना चाहती थी और 69 पोजीसन के बारे में सोचा मगर कार में ये संभव नहीं था. मेरी चूत में उस की ऊँगली लगातार घूम रही थी और मैं संतुष्टि के स्टेशन की तरफ बढ़ने लगी. उस की ऊँगली अब मेरी चूत में घुस कर चुदाई कर रही थी. मेरी फुद्दी को उसकी ऊँगली चोद रही थी. जैसे ही उस को पता चला की मैं पहुँचने वाली हूँ, उस ने मेरी चूत की चुदाई अपनी ऊँगली से जोर जोर से करनी शुरू करदी. वो मेरी चूत को अपनी ऊँगली से इतनी अच्छी तरह से, सेक्सी अंदाज़ में चोद रहा था की मैं झड़ने वाली थी और मरी नंगी गांड अपने आप ही हिलने लगी. मेरे मुंह से जोर से संतुष्टि की आवाज निकली और मैं झड़ गई. मैंने उसकी ऊँगली को अपने पैर, गांड और चूत टाईट करके अपनी चूत में ही जकड़ लिया और झड़ने का मज़ा लेने लगी.

आखिर मैंने उस से कह दिया की मैं उस के गरम लंड को चखना चाहती हूँ. मैं उस को इतना गरम करना चाहती की उस के लंड का पानी मेरी चूत में जल्दी ही बरस जाए. मैं उसको भी अपने अगले झड़ने के साथ झाड़ना चाहती थी. इस के लिए जरूरी था के मैं उस को चुदाई के आधे रास्ते पर चूत की चुदाई शुरू करने के पहले ही ले जाऊं.

हम ने फिर अपनी पोजीसन बदली और वो कार की पेसेंजर सीट पर अधलेटा हो गया और मैं ड्राइविंग सीट पर आ गई. उस का गरम, लम्बा, मोटा और पूरी तरह तना हुआ चुदाई का सामान लंड कार की छत की तरफ मुंह कर के खड़ा हुआ था जिस का नीचे का भाग मैंने अपने हथेली में पकड़ा. उस के लंड का सुपाडा पहले से ही बाहर था जिस को मैंने सीधे अपने मुंह में ले कर चुसना शुरू कर दिया. हे भगवान्, कितना गरम लंड है उसका. मैंने उस के लंड से बाहर आते पानी को चखा और अपनी जीभ उस के लंड के सुपाड़े पर घुमाने लगी. मेरा हाथ उस के लंड को पकड़ कर धीरे ऊपर नीचे होने लगा. मैं ड्राईवर सीट पर अपने घुटनों के बल बैठ कर, झुक कर उस के लंड को चूस रही थी, और मेरी नंगी गांड ऊपर हो गई थी. ये उस को खुला निमंत्रण था. उस ने अपना हाथ मेरी गोल नंगी गांड पर घुमाते हुए फिर से मेरी टाईट गांड में अपनी ऊँगली डाल दी. मैं उस को उस को उस का लौड़ा चूस कर, मुठ मार कर गरम कर रही थी और वो मुझे मेरी गांड में अपनी ऊँगली धीरे धीरे अन्दर बाहर कर के गरम कर रहा था. पंकज को गांड मारना पसंद नहीं था पर मेरी गांड में ऊँगली करना उस को हमेशा अच्छा लगता था, और सच कहूँ तो मुझे भी बहुत अच्छा लगता था. उस की मेरी गांड में घूमती ऊँगली मुझे चुदवाने के लिए बेचैन कर रही थी. 

मेरी उस के लंड की धीरे धीरे चुसाई और धीरे धीरे मुठ मारे अब तेज हो चली थी. मेरी दोनों चूचियां हवा में लटक रही थी और आगे पीछे हिल रही थी, मेरी गांड में उसकी ऊँगली भी बराबर घूम रही थी.जब मैंने महसूस किया की मैं उस को उसके लंड की चुसाई से और मुठ मार कर आधे रास्ते टक ले आई हूँ और अब चूत और लंड की चुदाई में हम साथ साथ झड़ सकतें है, तो मैंने उस के तनतनाते हुए लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला.

वो पेसेंजर सीट पर उसी तरह अधलेटा था और उस ने मुझे उसी पोजीसन में अपने ऊपर आने को कहा. मैं उस पर लेट गई. मेरी पीठ उस की छाती पर थी और उस का खड़ा हुआ चुदाई का औजार, उस का लंड मेरी गांड के नीचे था. उस के दोनों परों को मैंने अपने दोनों परों के बीच में ले कर चुदाई की पोजीसन बनाई. एक हात से मैंने मैंने कार के दरवाजे के ऊपर के हँडल का सहारा लिया और मेरा दूसरा हाथ ड्राईवर सीट के ऊपर था. मैं अब उस के लंड पर सवारी करने को तैयार थी. अपने दोनों हाथो के सहारा से मैंने अपनी गांड ऊपर की तो उस का लंड राजा मेरी गीली, गरम और चिकनी चूत के नीचे आ गया.

हम इस तरह की अधलेटी पोजीसन में पहली बार चुदाई कर  रहे थे और वो भी कार में. ये एक यादगार चुदाई  थी,जो मई लम्बे समय तक नहीं भूल पाया .दोस्तों ,अपने काजल की मु से पूरा चुदाई की दास्ताँ सुनी .

पर वोह याद बोहोत मस्त था ,पर उसके बाद हम दोनों ने कभी रिस्क नहीं लिया ,उसकी घर में ही अब मई जेक काम निपटाके अत हु .apne ye kahani jangal me mangal पढ़ी है काम रस हिंदी डोट कम पढ़ .

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