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Bhabhi ki gand fad chudai

 मेरी खेत मे हुई जबरदस्त चुदाई की है। कहानी दो साल पहले की है जब मेरी उम्र 19 साल की थी। मैं हरियाणा के एक गांव में रहती हूं। अकसर खेतो के काम से लगभग मेरा रोजाना खेतो में आना जाना होता  है।मेरे शरीर की कसावट ओर गांड की गोलाई किसी के भी लंड को खड़ा करने के लिए काफी है। जब भी मै खतों में जाती थी तो लोग मेरी मटकती गांड को देखकर मचल उठते थे। उस वक़्त तक मैं कुँवारी कली थी। उन्हीं में से एक लड़का मुझे रोजाना मिलता था। वो देखने मे हटटा-कटटा था। उसका शरीर गठीला था और किसी मर्द से कम नहीं लगता था।परन्तु उसका रंग हल्का काला था और देखने मे बदसूरत सा लगता था।
वो लगभग मुझे 2-3 महीनों से लगातार एक ही जगह पर घूरता हुआ मिलता था।
पहले तो मैंने उसकी तरफ ध्यान नही दिया लेकिन जब ये रोज का काम हो गया तो मुझे भी अच्छा लगने लगा। उसके बाद धीरे धीरे मुझे वो अच्छा  लगने लगा। वो वहां हमेशा अकेला ही खड़ा होके मुझे ताड़ता रहता था। मैं भी अब जब भी वह से निकलती तो उसे एक तीखी से स्माइल देकर निकलती ओर वो मचल उठता। मेरे स्तन 34 के थे और में छोटे टाइट फिटिंग के सूट सलवार पहनती थी। बड़े गले मे से मेरे चुचे आधे बाहर झाकते थे जिसे देखकर न जाने रोज कौन कौन मुठ मारते होंगे। धीरे धीरे वो भी मेरी तरफ आने लगा। ऐसे ही एक दिन मैं शाम को खेत से वापिस आ रही थी तब वो रास्ते में ही मिल गया। तब मैंने पहले बात सुरु की उससे ओर बोली कि तुम्हें ओर कोई काम नही है जो मुझे आते जाते ताड़ते रहते हो। तब वह बोला कि तुम हो ही देखने की चीज़ तो कम कहा से करूं। मैन पूछा ऐसा क्या है मेरे में तब वह बात काट गया और बोला फिर कभी बताऊंगा। उसके बाद मैंने उससे उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम रामू बताया। मेरे पूछने पर उसने बताया कि वो यह का नहीं ह यह अपने मामा के पास रहने आया है। धीरे धीरे हमारी बातें होने लगी। अब वो आते जाते मुझे रास्ते में मिलता ओर हम दूर तक बातें करते हुए निकल जाते। मैंने एक बात पर गौर किया कि जब भी हम साथ होते थे तो उसकी नज़र हमेशा मेरी गांड पर होती थी। दोस्तों मैं बताना भूल गई मेरा फिगर 34-28-34 है जो किसी भी मर्द के लंड का पानी निकालने के लिए काफी है। मैन उसे बातों ही बातों में पूछा कि तुम हमेशा मेरे पीछे का क्यों देखते हो तो वह बोला कि तुम मुझे बहुत अछी लगती हो। मैंने पूछा क्या अच्छा लगता है तब वह बोला कि मुझे तुम्हारी गांड बहुत अच्छी लगती है तब मैं बोली कि तुम्हे क्या चाहिए। वह बोला कि कल बताऊंगा। उसकी बातों से पता चल गया था कि वो मेरी गांड मारना चाहता है लेकिन जल्दबाजी में मज़ा नहीं आता इसलिए मैं उसे और गर्म करना चाहती थी लेकिन मैं अभी तक कुँवारी थी ओर डर भी था क्योंकि मेरी सहेलियों ने बताया था कि पीछे बहुत दर्द होता है।
अगले दिन जब मैं खेतो में गई तब वह नुक्कड़ पर ही मेरा इंतज़ार करता हुआ मिला। मैं उसे छेड़ते हुए बोली कि क्या बात है आज इंतज़ार नही हुआ क्या जो पहले ही आके खड़े हो गया। तब वह बोला कि अनिता तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ। चलते चलते हैम खेत में पहुंच गए। गर्मी का मौसम था और खेत में 6-6 फ़ुट बाजरे की फसल खड़ी थी। उसने मुझे कहा कि मैं तुम्हे गले लगाकर तुम्हे चूमना चाहता हूं। मैंने कहा कि यह कोई आ जाएगा तब वो बोला की अंदर खेत मे कोई नही आएगा और बाजरा भी लंबा ह तो हम दिखेंगे भी नहीं। मेरे अंदर भी लड्डू फूट रहे थे लेकिन डर भी बहुत लग रहा था। फिर भी म उसके साथ खेत में घुस गई। वहां जाते ही उसने मुझे पीछे से कस के पकड़ लिया और पीछे से मेरी गर्दन पर चूमने लगा। पहले तो मैं उसे हटाने लगी पर उसने मेरी एक नहीं सुनी और फिर सामने आकर मेरे होंठो को और गालों को चूमने लगा। अब धीरे धीरे मैं भी गर्म होने लगी। अब उसके हाथ मेरे 34 साइज के चुचे थे और वह उन्हें धीरे धीरे दबाने लगा। मेरे चुचे कभी किसी मर्द ने छए भी नहीं थे इसलिए उसके दबाते ही हल्का हल्का दर्द होने लगा लेकिन मज़ा भी बहुत आ रहा था। दबाते दबाते उसका एक हाथ नीचे सलवार के ऊपर से मेरी चूत को छूने लगा। वो मेरी छूट पर धीरे धीरे उंगलिया घूमाने लगा और मेरे होंठो को चूसने लगा। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। पहली बार था इसलिए जल्दी ही मेरी छचूत ने पानी छोड़ दिया और मेरी पेंटी गीली हो गई। मेरे मुंह से आह आह की आवाजें आने लगी। मैं गर्म हो गई थी और मेरी चूत में भी खुजली होने लगी थी। सच कहूँ तो मैं भी चुदासी हो गई थी। वो मेरे सूट को ऊपर करने लगा तो मैंने उसे मना  किया लेकिन उसने मेरी एक भी नहीं सुनी और इससे मेरा सूट हल्का सा फट गया। अब उसके सामने काली ब्रा में मेरे 34 साइज के चुचे थे। वो देखते ही उनपर टूट पड़ा और जोर जोर से दबाने लगा और फिर धीरे से हाथ पीछे ले जाकर ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा ऊपर कर चूसने लगा। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और दर्द भी हो रहा था। चूसते चूसते उसने मेरी सलवार का नाड़ा भी खोल दिया और पेंटी में हाथ डाल दिया। मैं उसे दूर करती रही पर उसने मेरी एक नही सुनी और उसने बहुत मज़बूती के साथ मुझे जकड़ रखा था तो मैं हिल भी नही पा रही थी। उसने मुझे लिटा दिया और मेरे ऊपर आकर के लेट गया और मुझे चूमने लगा। धीरे धीरे मेरा विरोध काम हो गया और मुझे मज़ा आने लगा। धीरे धीरे वो नीचे की तरफ बढ़ और मेरी नाभि में अपनी जीभ घुसाने लगा। मुझे बहुत मजा आ रहा था और मेरे मुंह से आवाजें निकलने लगी। अब उसका मुंह मेरी पेंटी पर था और फिर उसने एक झटके से मेरी पेंटी नीचे खींच दी। अब मैं उसके सामने बिल्कुल नंगी थी और उसने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए थे और कच्छे में था। उसके कच्छे में खड़े लंड से तंबू से बन गया था। उसने जब अपना लन्ड निकाला तो उसे देखते ही मैं डर गई कि इतना बड़ा लन्ड तो मेरी छूट फाड़ देगा।
उसके लन्ड करीब 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा था। वो उसे मेरे मुंह के पास लेकर आया और चूसने के लिए बोला। मैन मना किया तो उसने मेरे बल पकड़ लिए ओर जबरदस्ती मेरे मुंह मे घुस दिया। उसका लन्ड मेरे मुंह मे सही से जा भी नही पा रहा था और उसका टोपा मेरे गले तक पहुंच गया। में सांस भी मुश्किल से ले पा रही थी। मुझे खांसी आ गई और उसने मेरे मुंह से लंड निकाल लिया। उसने अपने मुह से थोड़ा सा थूक लन्ड के टोपे पर लगाया और लन्ड को मेरी चूत के छेद पर रख दिया। मुझे बहुत डर लग रहा था। उसके बाद वो मेरे ऊपर लेट गया और उसके लन्ड का दबाव मेरी छूट पर होने लगा। उसने अपने होंठो से मेरे होंठ भींचे ओर हल्का सा अपने लन्ड पर दबाव लगाया। मेरी चूत टाइट थी तो लन्ड अंदर जाने की बजाए फिसल गया। उसने दुबारा थोड़ा सा थूक लगाया और फिर से दबाव बनाया। इस बार लन्ड थोड़ा सा अंदर गया और मुझे दर्द होने लगा। मेरे मुंह से जैसे ही आह आह की आवाज आने लगी उसने मेरा मुह अपने होंठो से बंद कर दिया ताकि बाहर आवाज ना निकले। अचानक से उसने एक जोर का झटका मारा ओर लगभग आधा लन्ड मेरी चूत में चला गया। दर्द से मेरी हालत पतली हो गई। मैंने चीखने की कोशिश की और उसे हटाने लगी लेकिन उसकी ताकत के आगे में कमजोर पड़ गई और मेरी आँखों से आंसू बहने लगे। वो शान्त लेता रहा और थोड़ी देर में मेरा दर्द हल्का कम हुआ तो उसने एक ओर जोरदार झटका मारा तो उसका पूरा लन्ड मेरी चूत को फाड़ते हुए अंदर घुस गया। मेरी चीख निकल गई और मैं अंदर ही अंदर सिसकने लगी। वो 5 मिनट तक ऐसे ही मेरे ऊपर लेटा रहा। धीरे धीरे मेरा दर्द कम हुआ तो उसने हल्के हल्के धके लगाना सुरु कर दिया। अब मेरा दर्द कम हो गया था और मज़ा आने लगा था। मेरे मुंह से आह आह आह …….. की आवाजें आने लगी और उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी। उसका लन्ड मेरी चूत में जल्दी जल्दी बाहर अंदर होने लगा ओर मुझे मज़ा आने लगा। 10 मिनट छोड़ने के बाद उसकी स्पीड अचानक बढ़ गई और दो ही मिनट बाद उसने अपना गर्म गर्म लावा मेरी चूत में छोड़ दिया ओर मेरे ऊपर गिर गया और मुझे कस के पकड़ लिया। 5 मिनट बाद वो उठा तब मैंने देखा की मेरी चूत से खून निकला हुआ था। पहले तो म घबरा गई फिर याद आया कि मेरी सहेलियों ने भी यही बताया था कि पहली बार चुत में लन्ड डलवाने पर खून निकलता है। मै बैठी थी और अपनी फटी हुई चुत को देख रही थी जो सूज कर लाल हो गई थी कि तभी उसने धक्का देकर मुझे वापिस लिटा दिया और मेरे उपर आ गया। मुझे दर्द बहु था हल्का हल्का लेकिन जो मज़ा आया था उसे दुबारा लेने के लिए मैने उसका वरोध नही किया। मेरे ऊपर आने के बाद वो मेरे होंठ चूसने लगा। म फिर से गरम ही गई और अचानक झटके से उसने अपना लन्ड एक बार मे ही मेरी चुत में घुसा दिया और चोदने लगा। लगातार 25 मिनट छोड़ने के बाद वो मेरी चुत में ही झड़ गया। 10 मिनट बाद मैं खड़ी हुई तो मुझसे चला भी नहीं जा रहा था। वो सहारा देकर मुझे बाहर लेकर आया और फिर मुझे घर छोड़ कर आया। घर जाने पर घर वालो ने साहू से ना चल पाने का कारण पूछा तो घर वालो को यही बताया कि खेत मे पैर फिसलने से चोट लग गई इसलिए सही से नही चल पा रही हूँ।
उसके बाद हैम लोग रोज मिलते थे और खेत मे चुदाई करते थे।
बाद में एक दिन उसने मेरी गांड भी मेरी थी। वो कहानी आपको अगले भाग में लिखूंगी तब तक के लिए नमस्कार। तो दोस्तों कैसी लगी आपको मेरी ये कहानी।
मेरी कहानी खेत मे हुई गांड फाड् चुदाई का पहला भाग आपको कैसा लगा।
वह मैंने आप को बताया कि कैसे गांव में अपने मामा के आए हुए लड़के ने खेत मे मेरी चूत मारी थी। दोस्तो उस दिन के बाद हमारा चुदाई का सिलसिला लगातार चलता रहा। वो लगभग हर रोज खेत में आकर मेरी चुदाई करता था। धीरे धीरे भैया के साथ वो हमारे घर भी आने लगा। कभी कभी जब भैया नहीं होते थे तब भी आ जाता था और मौका मिलने पर हम लोग चुदाई करते थे। ऐसे ही एक बार चुदाई करते करते वह बोला कि अनिता मुझे तुम्हारी गांड बहुत पसन्द है, मैं तुम्हारी गांड मरना चाहता हूँ। गांड मरवाने की  सुनकर मैं डर गई और मेरी हालत पतली हो गई क्योंकि कुछ तो सहेलियों ने बताया था कि दर्द होता है और जब पहली बार चुदाई की थी तब भी कितना दर्द हुआ था। मैम उसे मन कर दिया परन्तु वो नही माना और बोला कल मैं तेरी गांड मारूँगा नहीं तो मैं नही आऊंगा अब। ये सुनकर मैं डर गई क्योंकि मैं उसे खोना नही चाहती थी इसलिए हाँ बोल दिया। अगले। दिन जब वो आया तो अपने साथ तेल की छोटी शीशी लेकर आया, मेरे पूछने पर उसने बताया कि इससे आराम से अंदर जाएगा और तुम्हे दर्द भी कम होगा। पहले उसने मेरी चुत मेरी और उसके बाद मुझे कुटिया बना दिया जिससे मेरी 34 साइज की गांड उसके सामने थी। उसने मेरे चूतड़ पर हाथ मार ओर फिर अपनी जीभ से मेरी गांड को चाटने लगा। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और हलक्ज गुदगुदी भी हिने लगी जिससे मैं अपनी गांड भीच लेती थी तो वो फिर मेरे चूतड़ पर जोर से चपत मरता। मार मारकर उसने मेरे चूतड़ लाल कर दिए। उसके बाद उसने मेरी गांड पर हल्का से तेल लगाया और उंगली से गांड के छेद पर तेल लगाने लगा और अचानक से एक उंगली गांड में डाल दी। अचानक उंगली डालने से मैं उचक कर आगे हो गई और उसकी उंगली बाहर निकल गई। उसने दुबारा अपनी उंगली पर तेल लगाया और उंगली फिर से मेरी गांड में डाल दी। मुझे दर्द हिने लगा और मैं सिसकियाँ लेने लगी। मेरे मुंह से आवाज आने लगी। वो अपनी उंगली अंदर बाहर करने लगा और गिर उसने दूसरी उंगली भी गांड में डाल दी। मुझे बहुत दर्द हुआ। वो जोर जोर से अपनी दोनों उंगलियां मेरी गांड में अन्दर बाहर करने लगा। मुझे मज़ा भी आ रहा था और दर्द भी हो रहा था। उंगली डालने से मेरी गांड हल्की सी खुल गई थी। उसके बाद वो आगे की तरफ आया और अपना लन्ड मेरे मुंह मे दाल दिया। मैं उसका लन्ड लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। फिर वह खड़ा हुआ और उसने अपने लन्ड पर बहुत सारा तेल लगाया और मेरी गांड में भी थोड़ा सा तेल डाल दिया। वो मेरे पीछे आया और अपना लंड गांड के छेद पर टिका दिया। मुझे डर भी लग रहा था और उत्सुकता भी हो रही थी। उसने आगे झुक कर अपने हाथ से मेरा मुंह दबाकर बन्द किया और एक जोरदार झटका मारा। मेरी चीख निकल गई और मेरे मुँह से आईईईईई आईईईईई की आवाजें आने लगी। उसका आधा लन्ड मेरी गांड को फाड़ता हुआ अंदर चला गया। मैं छटपटाने लगी और उससे छूटने की कोशिश करने लगी लेकिन उसने मुझे जकड़ा हुआ था। मेरी आंखों से आंसू बहने लगे। उसने अपना लन्ड बाहर निकाला और उस पर औऱ तेल लगाया और थोड़ा सा तेल मेरी गांड में भी डाल जो उसके लन्ड से खुल गई थी और मुझे तेल अंदर तक महसूस हुआ। वह फिर मेरी तरफ पीछे से झुका और अपना लन्ड गांड के छेद पर टिकाकर एक हाथ से मेरा मुंह बंद किया  और एक जबरदस्त शॉट मारा। उसका लंड मेरी गांड फाड़ते हुए पूरा अंदर तक चला गया। दर्द से मेरी हालत खराब हो गई थी । उसने मेरा मुंह बंद किया हुआ था इसलिए मैं चिल्ला भी नही सकती थी और दर्द से मैं लगभग बेहोश सी हो गई थी। वो ऐसे ही झुक रहा और उसका लन्ड मेरी गांड में फंसा हुआ था। थोड़ी देर बाद जब मेरा दर्द थोड़ा कम हुआ तो उसने हल्के हल्के झटके मारने सुरु कर दिए। मुझे भी अब थोड़ा थोड़ा मज़ा आने लगा था। कुछ देर बाद मैं भी आगे पीछे होने लगा तो उसने अपनी स्पीड बढ़ दी। वो कुत्ते की तरह पीछे से मेरी गांड मार रहा था और मैं मज़े से आह आह उन्ह उन्ह ……. की आवाजें निकाल रही थी। 10 मिनट बाद उसने स्पीड बढाई ओर अपना पानी मेरी गांड में छोड़ दिया और मेरे ऊपर ही लेट गया। दोनों पसीने में लथपथ थे और बुरी तरह से थक चुके थे। थोड़ी देर बाद उसने मेरी गांड से अपना लन्ड निकाला। मेरी गांड खुल गई थी और बहुत दर्द हो रहा था। मैं चलने लगी तो मुझसे दर्द की वजह से चला भी नही गया। फिर मैं शाम को घर गई और जाकर आराम किया। फिर ये सिलसिला सुरु हो गया कभी वो मेरी चुत में अपना लंड दाल कर चुदाई करता और कभी गांड में। हम लोग लगभग रोज चुदाई करते थे। 1 साल बाद वो वापिस अपने गांव चला गया और म उसके लिए तड़पती रही। पिछले साल मेरी बहु शादी हो गई और अब मैं अपनी सेक्स लाइफ से बहुत खुश हूं। कभी कभी उसकी याद आती है तो आंखों से आँसू बाह जाते हैं लेकिन यादें तो सिर्फ यादें ही होती हैं मेरे पति मुझे रोज नंगा करके छोड़ते हैं और मेरी चुत और गांड दोनों में अपना लन्ड डालकर अपना पानी निकालते है।
दोस्तो उम्मीद है आपको मेरी कहानी अछि लगी होगी।

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