मेरे को लंड खाने का भूत सवार था

हाय फ्रेंड्स मेरा नाम मोनिका सिंह है। मेरी उम्र 20 साल है। मैं देखने में ज्यादा खूबसूरत नहीं हूँ। इसीलिए मेरा अब तक कोई भी बॉयफ्रेंड नहीं बना। मेरा फिगर तो बहोत जबरदस्त दिया था, ईश्वर ने लेकिन शक्ल सूरत नहीं दी थी। मैं काफी मोटी और तगड़ी थी। लड़के मेरे को देखने के बाद इग्नोर कर देते थे। हर लड़की की तरह मेरा भी सपना था कि मेरा भी कोई बॉयफ्रेंड हो। लेकिन ये सपना सिर्फ सपना ही रहा गया। मेरे साथ कोई भी लड़का सेक्स करने को तैयार नहीं हो रहा था। मै चुदने को तड़प रही थी। मेरे को कुँवारेपन का एहसास सा होने लगा। मैं 18 साल की उम्र से ही चुदने की कामना करती थी। मै अपने चूत में ऊँगली डालकर चुदाई की प्यास मिटाती थी। लेकिन जो मजा लड़को के लंड में था, वो ऊँगली से कैसे ले पाती।

एक दिन मेरे भाई के साथ उनका एक दोस्त आया। उसका नाम भीम था। नाम की तरह उसकी बॉडी भी बड़ी लंबी चौड़ी थी। देखने में वो भी मेरी तरह था। फिगर तो उसका भी अच्छा था लेकिन वो भी मेरी तरह काला कलूटा बद्दसूरत था। उसने मेरी तरफ देखा तो कुछ देर देखता ही रह गया। मेरे बदन में चुदने की एक लहर सी दौड़ उठी। मै बहोत खुश हो रही थी। मन कर रहा था अभी ही जाकर भाई के सामने ही भीम से अपनी चूत फड़वा लू। भीम को मैं पसंद आ गयी थी। मेरी तरह वो भी तड़पता हुआ लग रहा था। चुदाई की प्यास क्या होती है ये केवल एक चुदासा इंसान ही जान सकता है। हम दोनों की एक ही कंडीशन थी। मै उसे अपनी तरफ लटके झटके दिखा कर आकर्षित कर रही थी। वो भी मेरे की ताड़ने रोज मेरे घर पर आने लगा। मै भी उसे थोड़ा बहोत मजा दे ही देती थी। एक दिन मेरा भाई और भीम दोनों बैठे बाते कर रहे थे।

मै चाय लेकर कुछ देर बाद देने गयी तो मेरा भाई नहीं था। वो बाथरूम गया हुआ था। भीम मेरे को ताड़ रहा था। मै भी उसकी आँखो में आँखे डालकर उससे बात कर रही थी। भीम मेरे को ताड़ते ताड़ते मेरी तरफ बढ़ने लगा। मैंने उसके हाथ में चाय दिया तो मेरे हाथों को पकड़ना चाहा। तभी मेरा भाई आ गया और सारा काम स्टॉप हो गया। मेरी चूत में उसने एक बार फिर से हलचल मचा दी। मैं तड़प उठी। मन ही मन भाई को कोसने लगी। आज मेरे को कन्फर्म हो गया था कि भीम मेरे को मौका पाकर चोद सकता है। कुछ दिन तक ऐसे ही चलता रहा।

एक दिन अचानक से पापा की तबियत खराब हो गया। मेरी मम्मी और भाई दोनों ही पापा को एक हॉस्पिटल में एडमिट कराये हुए थे। मै घर की रखवाली में घर पर ही रुकी थी। मै बैठे बैठे सोच ही रही थी की अचानक से मेरे दिल में एक ख्याल आया। मै दौड़ते हुए भैया के रूम में गयी। उनका फोन रूम में ही रखा था। मैंने उससे भीम का नम्बर डॉयल करके भीम को अपने घर पर आने को कहा। भीम मेरे घर कुछ ही देर में आ गया।

भीम: क्या बात है मोनिका?? बहोत परेशान लग रही हो
मैं: क्या बताऊँ भीम पापा की तबियत अचानक से खराब हो गयी है
भीम: भाई साहब तुम्हारे कहाँ है??
मैं: पापा को लेकर हॉस्पिटल एडमिट कराने ले गया है। मेरी तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा मै क्या करूँ??
भीम(मेरे को चिपकाते हुए): कुछ नहीं होगा अंकल को! मैं भी हॉस्पिटल जा रहा हूँ
मै: नहीं भीम! तुम मेरे पास रुको अकेले मेरा मन नहीं लग रहा है
भीम: ठीक है! रुक जाता हूँ लेकिन रुक कर करूंगा क्या??

मै: मेरे साथ रहोगे तो मेरा मन घर पर लगेगा
भीम भाई का फोन देख रहा था। उसमें एक लड़की की फोटो दिखी। मैंने भीम से पूछा तो उसने मेरे को इस लड़की के बारे में बताया। वो मेरे भाई की गर्लफ्रेंड थी।
मै: भीम तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड हो तो उसकी फोटो दिखाओ
भीम: मेरे जैसे बदसूरत लड़के से भला कौन फ़्रेंडशिप करेगा। लेकिन तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है क्या??
मै: नही! मैं भी तो तुम्हारी तरह हूँ। मेरा भी कोई बॉयफ्रेंड नहीं है

भीम: काश हम दोनों के पास भी होते!
मै: क्यों न हम लोग एक दूसरे के बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड बन जाए!
भीम: तेरे को मैं पसन्द हूं!

मेरे को लंड खाने का भूत सवार था। कई बार तो मैं अपने भाई को चोदने पर मजबूर कर दी। लेकिन भाई बहन का रिश्ता बनाकर वो मेरे साथ सेक्स ही नहीं करता था। मेरी काली चूत को कोई एक्सेप्ट ही नहीं कर रहा था। मेरे को हर किसी पर डोरे डालने की आदत हो गयी थी। मेरी ये लाख कोशिशें बेकार जा रही थी। मेरे को मेरे भाई ने नहीं चोदा लेकिन एक लंड का इंतजाम मैंने उसी के जरिये कर लिया। मेरे भाई के साथ उसके कई सारे दोस्त आते थे। लेकिन वो सारे के सारे खूबसूरत और स्मार्ट थे। मै अच्छी तो थी नहीं तो वो सारे मेरे को अपनी बहन की नजर से देखते थे।

 

मै भी चुदने के लिए गधे को भी बाप बना सकती थी। मैंने भी अपनी सहमति प्रदान की। अब क्या था। आज रास्ता भी क्लियर था। घर पर कोई नहीं था। भीम को।भी शायद मौके का इंतजार था। वो मेरे से रोमांटिक बात करके मेरा मूड बनाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन उसे नही पता था कि मेरा मूड तो पहले से हो बन चुका है। धीरे धीरे वो मेरे से रोमांटिक बाते करते करते मेरे बदन को सहलाने लगा। मेरा पैर उसकी तरफ था। वो मेरी जांघ पर अपना हाथ रखे था। मैं भीम की तरफ बढ़ने लगी। भीम भी मेरी तरफ चुम्बक की तरफ आकर्षित हो रहा है। हम दोनों एक दूसरे से चिपक गए। मेरे को उसने अपनी बाहों में भर लिया। मेरे पीठ पर हाथ फेरने लगा। मेरी पीठ पर ब्रा की हुक गड रही थी।

मेरे को उसने किस करना शुरू किया। उसने अपने काले होंठो को मेरे होंठ से टिका दिया। मेरी काली काली होंठो होंठो को चूस रहा था। भीम मेरे होंठो को चूस कर अपने होंठो की प्यास बुझा रहा था। मै भी उसका साथ बाखूबी से निभा रही थी। वो मेरी मुह के अंदर अपनी जीभ डाल कर मेरी जीभ लगा कर किस का भरपूर आनंद ले रहा था। वो मेरे चुच्चो को अपने हाथो मे लेकर मेरे को किस कर रहा था। वो मेरे गले पर किस कर रहा था। मै गर्म होकर अपनी नाक स गरमा गरम साँसे छोड़ रही थी।

मेरी तेज साँसों से भीम समझ गया कि मैं गर्म हो चुकी हूँ। उस दिन मैंने नया नया ड्रेस पहना हुआ था। जीन्स और टी शर्ट में मै भी थोड़ा बहोत अच्छी लगती थी। भीम को भी चूत की प्यास थी। उसने मेरी सफ़ेद रंग के टी शर्ट को निकाल दिया। मैंने उस दिन सफ़ेद रंग की ब्रा और पैंटी भी पहनी हुई थी। मेरे को ब्रा में देखकर वो खुश हो गया। भीम ने मेरी ब्रा को निकाल कर मेरे चुच्चो को पीने लगा। काले काले निप्पलों को दबाते हुए वो जमकर पी रहा था। उसके दांत मेरे निप्पलों में गड़ रहे थे। मैं जोर-जोर से सिसकारियां भरने लगी। “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअ अ….आ हा …हा हा हा” की मदमस्त सिसकारियां मेरे मुंह से निकलने लगी। भीम और जोर जोर से मेरे चूचो को दबा दबा कर पीने लगा।

कुछ कुछ देर तक मेरे दूध को पीने के बाद भीम ने मेरा हाथ पकड़ा। वह पैंट के ऊपर से ही अपने लंड को मेरे हाथों से सहलाने लगा। उसके बॉडी की तरह उसका लंड भी बहुत मोटा तगड़ा लग रहा था। मैंने उसके लंड को देखने के लिए उसके पैंट से बेल्ट निकाल दिया। पैंट का हुक खोलते ही उसका लंड अंडरवियर में फूला हुआ दिख रहा था। मेरे तो पांव तले जमीन खिसक गई। इतने दिनों से लंड देखने की तड़प आज पूरी होने वाली थी। सच ही कहा है किसी ने सब्र का फल मीठा होता है। कुछ ऐसा भी हुआ मेरे साथ! मैं जितना ही लंड खाने के लिए तड़पी थी। आज मेरे को उतना ही मोटा लंड मिलने वाला था। भीम ने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया। उसका काला मोटा घोड़े जैसा लंड मेरे सामने उपस्थित था वह देखने में बहुत ही डरावना लग रहा था।

भीम अपने लंड को सहलाते हुए उसके टोपे से खाल को पीछे की तरफ धकेला! मेरे को उसका गुलाबी रंग का सुपारा साफ साफ दिखने लगा आइसक्रीम की तरह पिंक कलर के हैं उस सुपारे को काट काट कर खाने का मन करने लगा। मैंने वैसा ही किया। उसका लंड जोर जोर से हिला हिला कर चूसने लगी। भीम भी मेरी चूत चाटने को व्याकुल था। उसने भी कुछ देर अपना लंड मेरी मुंह में रखकर चुसाया। मैंने उसके लंड के साथ खेल कर खूब मजे उड़ाए। भीम ने मेरी चूत चाटने के लिए मेरे को खडा किया। मेरी जीन्स को निकालकर उसने मेरे को पैंटी में कर दिया। मै चुदने को तड़पने लगी। भीम ने मेरी जल्दी से पैंटी को निकाल कर मेरे को सोफे पर बिठा दिया। मेरी टांगो को खोलकर काली कलूटी चूत के दर्शन कर के वो चाटने लगा। वो सोफे से नीचे बैठा था।

मैं “ओहह्ह्ह…ओह्ह् ह्ह…अ ह्हह्हह…अई..अई. .अई… उ उ उ उ उ…” की आवाज निकाल रही थी। मेरी आवाज को सुनकर वो और भी ज्यादा तेज चूसने लगता था। मेरी चूत के ऊपर उभरी हुई ख़ाल तो कुछ ज्यादा ही काली थी। फिर भी उसने काफी देर तक मेरी चूत को चाट कर मजा लिया। वो खड़ा हो गया। मेरी टांगों को पकड़ कर वो झुक गया। उसका लंड ठीक मेरी चूत के ऊपर था। मेरी चूत में अपना लंड वो जोर जोर से रगड़ने लगा। मै फिर एक बार तड़प कर उससे लिपट गयी। उसने कुछ पल लंड को मेरी चूत में रगड़ने के बाद छेद से सटा दिया। भीम बार बार धक्का मार कर उसने मेरी चूत में लंड घुसाने की कोशिश कर रहा था। मेरे चूत की छोटी छेद में उसका लंड बहोत कोशिशों के बाद घुस ही गया। मैं जोर जोर से “……मम् मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊ ऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” की चीखें निकाल रही थी। मेरी चूत में वो अपनी कमर झुक कर पेल रहा था। मैं भी बड़े मजे ले ले कर चुदवा रही थी।

पहली बार की चुदाई का आनंद ही कुछ और था। उस दिन की चुदाई को याद करके मेरी आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। वो जोर जोर से अपना लंड मेरी चूत में डाले हुए मशीन की तरह चोद रहा था। गांड पर हाथ पटक पटक कर उसे धीरे धीरे से चोदने की विनती कर रही थी। लेकिन वो चूत का भुक्खड़ हवसी इंसान मेरी सुन ही नहीं रहा था। जोर जोर से अपना लंड डाल कर मेरी चुदाई किये जा रहा था। पूरा कमरा “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….” की आवाजो से भरा हुआ था। मेरी चूत को फाड़कर उसने भोषडा बना डाला। मेरे को भी अपनी चूत में उसका लंड उसका भर्ता लगा रहा था। मै भी अपनी गांड उठा उठा कर उसका लंड खा रही थी। पहली बार किये गए संभोग में मेरे को दर्द में भी ज्यादा मजा आ रहा था। मेरी चूत को फाड़कर आज मेरे को पहली बार चुदाई कस एहसास भीम ने करा दिया था।
वो लगभग मेरे को आधे घंटे से अधिक इसी पोजीशन में चोदता रहा। फ्रेंड्स मेरे को भी उस समय सेक्स पोजीशन के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था। हम लोग झड़ने की स्थिति में आ गए थे। भीम अपने घोड़े जैसे लंड को जोर जोर से मेरी चूत में घुसा कर अंदर बाहर करने लगा। मेरी चूत एक बार फिर से दर्द करने लगी। मै “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” की आवाजो के साथ झड़ गयी। भीम की भी पिचकारी कुछ देर बाद निकल गयी। वो मेरी चूत से बाहर झड़ गया। हम दोनों का माल मिक्स होकर एक साथ नीचे गिरने लगा। वो थक हार कर अपनी कमर सीधी करते हुए सोफे पर बैठ गया। उस दिन उसने कई बार चुदाई की। बाद में उसने मेरी गांड चोद कर बहोत ही आनंद दिया। आपको स्टोरी कैसी लगी मेरे को जरुर बताना और सभी फ्रेंड्स नई नई स्टोरीज kamrashindi.com पर पढ़ते रहना. आप स्टोरी को शेयर भी करना.

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