दोस्त की बीवी बड़ी सेक्सी

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Hindi chudai kahaniya ,sexy hindi stories ,urdu hot story हेल्लो दोस्तों,मेरा नाम अनुराग है और मई काम रस हिंदी डॉट कम का एक रेगुलर विजिटर हु .मुझे कहानी पडके लगा की मुझे भी अपना एक कहानी इस में लिखना है इसलिए मई सोचा क्यों न अप न कहानी भेज दू.मई थोडा सा अपना परिचय करवा दू ,मई एक २२ साल का गबरू जबान हु और मई अभी भी कॉलेज में पढाई कर रहा हु .कहानी का मोड़ आया तब जब हमारे घर के बाजू में एक शादीशुदा जोड़ा किराये से रहने के लिए आया था.उस औरत का पति का नाम दिलीप जो दिखने में एकदम काला था लेकिन भाभी एकदम मस्त माल थी जिसका नाम प्रेमाग्नि था.उस का नाम भी जैसा था वोह है भी वैसा ही .उसको देख के पूरा तन बदन में आग भड़क उठेगा. उस का कद काठी कुछ 5 फुट के आसपास , और फिगर का साइज़ स्तन 36 और कमर ३० और कुल्हा 34 की.और सुन्दरता की बात करूँ तो भाभी दिखने में एकदम मस्त थी गोरी चिट्टी और स्मार्ट .आप ये कहानी काम रस हिंदी डॉट कम पर पढ़ रहे है .

दिलीप भाभी का पति सुना था की कोई कारखाने में काम करते थे उनका समय करीब-करीब रात 11 से सुबह के 10 बजे तक रहता था ! हमारे घर वालों से वो जल्दी ही मिलजुल गए थे और मैं भी उनके यहाँ जाता आता रहता था ! वो मेरा ही हम उम्र था इसीलिए वो मेरा अच्छा दोस्त बन गया।रात को कभी कभी कारखाना जाने के टाइम मेरे से बाइक मांग के लेके जाता था,पेट्रोल खुद ही डालता था। हम हर सन्डे के सन्डे बार में दारू पीते थे और करीब 11 बजे तक घर पहुँचते थे। यह हमारा जैसे रोज का ही नाटक हो गया था। रोज भाभी मुझे बोलती थी कि आप इनके साथ बिगड़ गए हो।ऐसा करीब एक महीने तक चलता रहा।एक दिन हमको दिलीप के दोस्तों ने खूब पिला दी जिसकी वजह से उसको कुछ भी होश नहीं रहा, मैं उसको बाइक पर बिठा कर अपने साथ बांधकर घर लेकर आया और घर के अन्दर पलंग पर सुला दिया .भाभी ने उनको देखा और हंसने लगी .आप ये कहानी काम रस हिंदी डॉट कम पर पढ़ रहे है .

मैंने भाभी से पूछा,”भाभी आप हंस क्यों रही हो?”भाभी बोली,”रोज होश में आते आज होश भी नहीं बचा?”मैं बोला- होता है भाभी, कभी-कभी ज्यादा हो जाती है, उसमें हंसने की क्या बात है !भाभी बोली- वो सब ठीक है लेकिन अब ये खाना खायेंगे या नहीं?मैं – अब तो ये सीधा कल सुबह ही खायेंगे !इतना बोल कर मैं चलने लगा तो भाभी बोली- अनुराग भैय्या, इनको कोई तकलीफ तो नहीं होगी ना ज्यादा पीने से?मैं – कुछ नहीं होगा भाभी, आप आराम से सो जाओ !भाभी बोली- देखिये रोज होश में रहते हैं, आज कुछ ज्यादा ही पी गए ! प्लीज… आज के लिए आप यहीं सो जाओ ना !

मैं बोला- ठीक है… आपको कोई तकलीफ नहीं तो मैं यहीं सो जाता हूँ !उन्होंने मेरे लिए नीचे बिस्तर बिछा दिया और वो पलंग पर दिलीप के साथ सो गई !उनका कमरा छोटा था इसीलिए उनको दिलीप के साथ सोना पड़ा। उन्होंने दिलीप को दीवार से चिपका दिया और वो खुद मेरी तरफ़ पलंग पर सोई !लाइट अभी भी जल रही थी जिस वजह से मुझे नींद नहीं आ रही थी ! मैं कभी इस तरफ कभी उस तरफ करवट ले रहा था !आधे घंटे के बाद भाभी बोली- क्यों, आपको नींद नहीं आ रही क्या?मैं बोला- भाभी, मुझे उजाले में सोने की आदत नहीं है इसीलिए नींद नहीं आ रही है !भाभी – ठीक है, मैं लाइट बंद कर देती हूँ !और वो उठी और लाइट बंद करके सो गई।आप ये कहानी काम रस हिंदी डॉट कम पर पढ़ रहे है .

अब भी मुझे नींद नहीं आ रही थी !ऐसा करते करते 2-3 घंटे बीत चुके थे दिलीप खर्राटे लेकर मस्त सोया हुआ था !बाजु के घर में लाइट जल रही थी जिसकी वजह से थोड़ा बहुत अन्दर दिख रहा था ! अब भाभी पूरी गहरी नींद में थी ! नींद में ही वह करवट लेने लगी तो उनकी साड़ी का पल्लू नीचे मेरे ऊपर गिर गया ! अब मुझे उनके दोनों स्तन ब्लाउज में बंधे हुए दिख रहे थे .

यह देख कर मेरे दिमाग भाभी को छूने का और उनके स्तन को दबाने विचार आ रहा था जिस वजह से मेरा लंड खड़ा होने लगा। सोचा रतन बेवड़ा तो सोया हुआ है, क्यों ना मैं थोड़ा मजा कर लूँ !मैं उनकी ओर पलट गया और अपना हाथ ऊपर पलंग की ओर करके उनकी कमर पर रख दिया और धीरे-धीरे करके उसे आगे बढ़ाते हुए ब्लाउज तक पहुँच गया। अब मैं उनके स्तनों को ब्लाउज के ऊपर से सहला रहा था और एक हाथ से अपने खड़े लंड को मसल रहा था ! अभी भी भाभी नींद में ही थी !मेरी हिम्मत और बढ़ गई, अब मैं अपने हाथ को उनके नंगे पेट पर भी घुमा रहा था जिसकी वजह से मेरा लंड आग-बबूला हो रहा था। अब मैं भाभी को चोदने की सोच रहा था।मैंने उनकी ब्लाउज के बटन खोलने का सोचा और उन्हें खोलना शुरु किया। अब तक 1-2 ही बटन खोले थे कि मुझे ऐसे महसूस हुआ जैसे भाभी मुझे देख रही है !आप ये कहानी काम रस हिंदी डॉट कम पर पढ़ रहे है .

फिर भाभी जग गयी और मेरा हठ पकड़ लिया और मई हाथ को छुड़ाने की कोसिस की पर भाभी मेरा हाथ पकड़ा रहा .भाभी बोला ,”क्या हुआ ? रुक क्यू गये ?”मुझे दिखे की भाभी का सम्मति है इस में . फिर मैंने उसे उल्टा करके उसे बेड पर धक्का दे दिया और उस पर टूट पड़ा और उसे लगातार किस करने लगा. अब मेरे हाथ उसके बूब्स पर थे, क्या मस्त बूब्स थे? एकदम फुटबॉल की तरह.

अब में उसे बहुत जोर से चूस  रहा था और जोर से दबा रहा था. अब वो धीरे से कहा ,अनुराग जी धीरे करो, दर्द हो रहा है,दिलीप उस की पति पास में ही सोया हुआ था. फिर मैंने  भी चुप के से कहा कि दर्द में ही तो मज़ा है जान और फिर में उसे स्मूच करने लगा, अब वो भी मेरा साथ देने लगी थी. अब उसके दोनों हाथ मेरे बालों में घूम रहे थे. अब भाभी की जीभ मेरी जीभ से टकरा रही थी और अब उसकी साँसे मुझे पागल बना रही थी. उसके होंठो का स्वाद बहुत जबरदस्त था.फिर में धीरे-धीरे नीचे की तरफ बड़ने लगा और अब मेरा एक हाथ उसके साड़ी के ऊपर से ही उसकी चूत पर पहुँच गया और उसे रगड़ने लगा.अब उसे मज़ा आने लगा था और उसने अपनी टाँगे चौड़ी कर ली थी. अब मेरा एक हाथ उसके बूब्स को प्रेस कर रहा था और में उसके बूब्स पर क़िस कर रहा था.

फिर मैंने उसे उठाकर उसकी साड़ी उतार दी, उसने अंदर काली ब्रा पहन रखी थी और उसके फुटबॉल जैसे बूब्स ब्रा में क़ैद थे. अब मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने उसे पलट कर उसकी ब्रा के हुक को अपने मुँह से खोलने लगा तो उसे सरसराहट सी होने लगी. फिर भाभी ने कहा कि अनुराग गुदगुदी हो रही है तुम हाथ से खोल दो, अब में हुक खोलने में मस्त था और फिर मैंने उसकी ब्रा के हुक खोल दिए और उसके बूब्स को आज़ाद कर दिया. अब उसके बड़े-बड़े निप्पल पूरे आजाद थे. फिर मैंने उसे सीधा करके उसके बूब्स को फिर से अपने मुँह में पूरा डाल लिया और उसके निप्पल को चूसने लगा.आप ये कहानी काम रस हिंदी डॉट कम पर पढ़ रहे है .

अब में धीरे-धीरे और नीचे बड़ने लगा, उसकी नाभि बहुत गहरी थी और अब में उसकी नाभि में अपनी जीभ घुसा कर चूसने लगा और वो मेरे सर पर अपना हाथ रखकर दबाने लगी.फिर मैंने उसकी चूत पर हाथ फेरा और अपने होंठो से उसकी पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को चूमा, अब उसकी पेंटी गीली हो गई थी और एक बार ईशा झड़ भी गई थी. फिर मैंने उसकी पेंटी को भी खोल दिया और अब भाभी मेरे सामने पूरी नंगी थी, अब वो किसी भी तरीके से शादि शुदा नहीं लग रही थी. फिर मैंने उसकी टाँगे ऊपर उठाई और अपनी जीभ उसकी चूत में धीरे-धीरे घुमाने लगा और उसकी गीली चूत को चाटने लगा, क्या स्वादिष्ट चूत थी उसकी? ह्म्‍म्म्मम उूउुआअ.

अब मुझे उसकी चूत का बहता हुआ पानी पीने में बहुत मज़ा आ रहा था. फिर उसने अपनी कमर ऊपर उठाकर मेरे मुँह को कसकर अपनी चूत पर दबा दिया तो मुझे और जोश आने लगा. फिर मैंने अपनी जीभ पूरी बाहर निकाल कर भाभी की चूत की गहराई में घुसा दी और फिर उसकी चूत के दाने को अपने दातों में दबाकर जोर-जोर से काटने लगा.तब उसने अपने पूरे शरीर को कसना शुरू कर दिया और मेरे सर को पकड़कर अपनी चूत पर कसकर दबा दिया और आआअहह की आवाज़ निकालते हुए झड़ गई.

फिर मैंने उसकी चूत को साफ कर दिया. फिर में अगले राउंड के लिए तैयार हो गया, उसकी चूत भी काफ़ी टाईट थी और वो ज्यादा चुदी ना होने के कारण वो कुंवारी ही लग रही थी.फिर मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए, अब भाभी मेरा लंड देखकर पागल सी हो गई थी. फिर मैंने अपना लंड उसके हाथ में दे दिया और उसे चूसने को बोला तो भाभी ने भी बिना देर किए मेरे लंड को अपने मुँह में डाल लिया और लॉलीपोप की तरह चूसने लगी. फिर मैंने उसके बालों को पकड़कर अपने लंड को उसके गले तक उतार दिया और उसके मुँह में जोर-जोर से धक्के मारकर चोदने लगा. अब लगातार उसके मुँह को चोदने के बाद में उसके मुँह में ही झड़ गया और वो मेरा सारा पानी पी गई.आप ये कहानी काम रस हिंदी डॉट कम पर पढ़ रहे है .

फिर मैंने उसे दोबारा स्मूच करना शुरू कर दिया. अब वो मेरा लंड पकड़कर सहलाने लगी थी तो मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. फिर मैंने ईशा को अपनी टाँगे खोलने को कहा तो उसने अपनी टाँगे खोली. फिर मैंने उसकी टाँगे ऊपर की तरफ उठाई और अपने दोनों हाथों की उंगलियों से उसकी चूत को चौड़ा करने लगा. अब में उसकी चूत को खोलकर अंदर तक झाँक रहा था. फिर ईशा ने पूछा कि क्या कर रहे हो साहिल? मेरी चूत को चीरने का इरादा है क्या? तो मैंने कहा कि में चूत की गहराई देख रहा हूँ कि तुम्हारी चूत अंदर से कितनी लाल है.

फिर मैंने अपना पूरा मुँह उसकी चूत की गहराई में रखकर चूमा और फिर में उसके ऊपर आ गया और उसकी टाँगे उठाकर अपने कंधो पर रख दी और अपना लंड उसकी चूत पर सेट करके एक जोरदार धक्का मारा और अपना सारा लंड उसकी चूत की गहराई में घुसा दिया. पहले से चुदी होने के कारण उसे ज्यादा तकलीफ़ नहीं हुई, लेकिन उसकी चीख निकल गई और उसको काफ़ी टाईम से ना चुदवाने के कारण उसकी चूत टाईट थी. फिर मैंने धीरे-धीरे उसे धक्के मारना शुरू कर दिया और अब उसे भी मज़ा आने लगा था और अब वो भी अपनी कमर उछाल-उछाल कर चुदवाने लगी थी. अब मैंने अपने धक्को की स्पीड और तेज कर दी और लगातार तेज-तेज धक्के मारने लगा. फिर 10 मिनट तक चोदने के बाद मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा और वो घोड़ी बन गई.आप ये कहानी काम रस हिंदी डॉट कम पर पढ़ रहे है .

पर तभी लगा की ,दिलीप जाग जायेगा और हम दोनों सतर्क हो गये और जल्दी से अपने कपडे पेहेन लिए ,और चुप चाप सो गये .पर मेरा काम पूरा हो गया था .सुबह जल्दी से मई भाभी को ना बोलके निकल गया .पर जब भी दिलीप नहीं रहता तो मई घर में जाता और भाभी से मिला करता हु .

धन्यबाद ……………..

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