दोस्त की मम्मी सुनीता आंटी

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Dost ki mummy sunita aunty हेल्लो दोस्तों ,मेरा नाम रोहन है और आप सभी को अपना एक चुदाई एक्सपीरियंस शेयर करने करने जा रहा हु. ये स्टोरी मेरी और मेरे फ्रेंड की मम्मी की कहानी है,जिसको मई यहाँ पे आंटी करके सोम्बोधन किया है . मैं मुंबई का रहने वाला हु. मेरा एक बोहोत करीबी दोस्त है , उसका नाम अनिकेत  है. और वो मेरेचौल में ही कुछ घर छोड़ के रहेता है ,हम लोग एक दुसरे के फॅमिली को कई अरसे से जानते है ,और हम एक दुसरे के घर आना जाना लगे रहेता है. उसके घर में उसके फादर है , मम्मी का नाम सुनीता आंटी  है और एक सिस्टर है. उसकी मम्मी यानि आंटी बोहोत ही हॉट थी .उनका  ऐज  कुछ 40 के आसपास होगा , बॉडी स्टेटस  36-३०-32 .

अब मैं स्टोरी पर आता हु. अनिकेत  के फादर दुबई  में रहते है और मोस्टली २ बार ही आते है साल में.बारवी पास करने के बाद ,अनिकेत हायर स्टडी  के लिए बैंगलोर चला गया और घर पर सिर्फ सुनीता आंटी और अनिकेत का छोटी बेहें  ही रह गये थे. अनिकेत मेरा चाइल्डहुड फ्रेंड था, तो नॉर्मली कोई भी काम होता; तो आंटी मेरे को कहती थी. मैं आंटी से मिलने के बहाने ढूंढता ही था, क्योंकि आंटी एक मस्त माल थी. उनके बड़े – बड़े बूब्स देखते ही, मेरा लंड खड़ा हो जाता था. मैं नॉर्मली आंटी के साथ मार्किट जाता था और कभी भी उन्हें टच करने का मौका नहीं छोड़ता था. एक साल बाद, अनिकेत की बेहें भी बैंगलोर पढने चली गयी और अब सिर्फ आंटी ही रह गयी थी अकेली घर पर. मुझे तो अब और भी मज़ा आने लगा. आंटी फुल्ली मेरे पर डिपेंडेंट थी और मैं रोज़ इवनिंग में ५ बजे, उनसे पूछने जाता, कि कोई काम तो नहीं है? और इस बहाने उनसे बातें करता और कभी कुछ करने का मौका नहीं मिला.

एक दिन, मैं जब आंटी से ऐसे ही बात कर रहा था, तो आंटी ने फेसबुक के बारे में पूछा और कहा, कि उनकी फ्रेंड उसे कहती है की आजकल के बच्चे बच्चे भी फेसबुक पे चाट करती है ,तू क्यों अकाउंट खोल नहीं लेता . तो मई आंटी को फेसबुक में अकाउंट खोल ने के लिए मदत किया. मैंने उनका अकाउंट बना दिया और उन्हें यूज़ करना सिखाने लगा. धीरे – धीरे वो सब सिख गयी. एकदिन मैंने सोचा, देखू… आंटी फेसबुक पर किस से चैट करती है. मैंने ही उनका अकाउंट बनाया था, तो मुझे पासवर्ड तो पता ही था. मैंने उनकी आईडी ओपन की और सब कुछ नार्मल ही लग रहा था. फिर मैंने उनके मेसेज रीड करने शुरू किये. वो वहां एक आंटी से चैट कर रही थी उसकी अकेलेपन के बारे में , हर फिजिकल नीड और उनकी फ्रेंड उन्हें सजसट कर रही थी, कि शी शुड ट्राई समवन तू फुलफिल हर नीड. मैंने सोचा, क्यों ना मैं ही समवन बन जाऊ, पर कैसे? कुछ दिनों के बाद, मैंने फिर उनके मेसेज चेक किये. तो मई बारा ही अस्चर्या चकित हो गया , कि आंटी वाज टेलिंग कि शी ईज स्पीकिंग विद समवन और कल उसके साथ डेट पर जा रही है.

मैंने प्लान बनाया, कि मैं आंटी को फॉलो करूँगा. और मैंने फॉलो किया. डेट पर कुछ खास नहीं हुआ. दोनों एक रेस्टुरेंट में गये, मिले और बातें की. मैंने उनकी पिक्स क्लिक की. पर वोह आंटी को ब्लैक मेल करने के लिए काफी नहीं था . अब मैं आंटी को फोलो करने लगा था, लेकिन वो ज्यादातर फ़ोन पर रहती थी. अब मैंने ओब्सेर्व किया, कि उनके फेस पर अजीब सा ग्लो था. एक दिन मैंने उन्हें अच्छे से तैयार होकर कहीं जाते हुए देखा. मैं उन्हें फॉलो करने लगा. इस बार वो लोग एक पार्क में मिले और थोड़ा ज्यादा कम्फ़र्टेबल थे. फिर वो आदमी आंटी को किस करने लगा. मैं उनकी सारी एक्टिविटी की पिक्स ले रहा था. उस आदमी को भी आंटी ने किस दिए और हग किया. फिर वो लोग वहां से चले गये. मैं भी घर आ गया और रात को मैंने सुनीता आंटी को अपने अल्टरनेट नंबर से वो पिक्स व्हाट्सएप कर दी. ये नंबर आंटी के पास नहीं था. आंटी डर गयी और उन्होंने मुझे कॉल किया. मैंने अननॉन बनकर उनसे बात की और कहा – मैं कल इवनिंग में 6 बजे, उनके घर आऊंगा और तब बताऊंगा, कि मुझे क्या चाहिए. वो फस चुकी थी, तो उन्होंने हाँ कर दी.

मैंने सोच लिया था, कुछ भी हो जाए. आज सुनीता आंटी को चोद कर रहूँगा. मैंने 6  बजे उनकी डोरबेल बजायी और उन्होंने डोर ओपन किया. उनको लगा, कि मैं रोज़ की तरह आया हु. उन्होंने मुझे जाने को कहा.

आंटी -अज मेरे घर कुछ महेमन आने वाला है ,तो मई उनके साथ बहार निकलने वाला हु  .

मई -व्हाट्स अप्प वाला महेमन .तो आंटी चौक गया ,मई बोला आंटी मई ही हु वोह महेमन ,आंटी जल्दी ही दरवाजा बांध किया और मुझे अपने बेड रूम पे ले गया और कहा ,रोहन ये सब क्या है ? और तुम चाहते क्या हो ? मैंने आंटी का हठ पकड़ के कहा ,”अप को .” आंटी थोडा सा नर्वस हो गया था ,मई उनके होठो पर होठ रख दिया और  उनके होंठ चूसने शुरू कर दिए। वो भी बड़ी ही लज्जत से मेरे होंठ चूस और काट रही थीं।किस करते हुए ही मैंने चालाकी से अपना पैन्ट उतार दिया और मेरे लंड  महाराज को आजाद कर दिया.. जो कि तकरीबन कई दिनों भूखा पढ़ा था। मेरा अनाकोंडा  अब अपने पूरे उफान पर था और वोह अपने होल में जाने के लिए बेकरार था।

मैंने अब आंटी  को पीछे से पकड़ के सोफे पर लिटा दिया और उन पर चढ़ कर उन्हें बेतहाशा चूमने लगा, वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थीं।मैं इस दौरान अपना अनाकोंडा उनकी होल  पर रगड़ रहा था और क्या बताऊँ  दोस्तों तभी वो वक्त आ गया.. जिसका मुझे शिद्दत से इंतजार था।
उन्होंने खुद मेरा अनाकोंडा पकड़ कर अपनी होल के छेद पर रख दिया, मैंने भी देर न करते हुए धीरे से अपना सुपाडा अन्दर घुसा दिया।
इस दौरान उन्होंने अपने आपको थोड़ा एडजस्ट किया.. जिससे उनकी होल में मेरा  चाबी पूरा फिट हो गया ।
मैंने भी थोड़ा और जोर लगा कर आधा लैंड अन्दर डाल दिया।इस दौरान उनको थोड़ा दर्द हुआ.. तो उन्होंने चूमना छोड़ के मुझसे कहा- बस इतना ही रोहन ..मैंने कहा- आंटी  अभी तो आधा ही गया है।तो वो बोली- क्या बोल रहे हो.. ये कैसे हो सकता है?मैंने कहा- खुद ही देख लो।

जैसे मैंने उनको दिखाने के लिए बाबूराव निकालने की कोशिश की.. उन्होंने मेरी गान्ड पकड़ कर अपनी पर खींचा और बोलीं- निकालो मत.. आज पहली बार इतना मजा आया है चुदाई में.. जब तक में न कहूँ.. निकालना मत.. वर्ना दोबारा कभी इसके दीदार नहीं होंगे।

इस पर मैंने भी अपना अनाकोंडा होल की गहराइयों में पूरी तरह ठूँस दिया और उनकी एक हल्की सी चीख भी निकल गई।
उन्होंने अपने आपको थोड़ा एडजस्ट किया और मेरी गान्ड पकड़ कर अपनी और खींचा.. जैसे उन्हें और अन्दर मेरा लंड चाहिए हो। मैं तो हैरान था कि इन औरतों का भी अजीब है.. एक तरफ चीखती हैं और एक ओर और ज्यादा अनाकोंडा  चाहती हैं।मैंने भी देर न करते हुए अपनी स्पीड बढ़ा दी। हर बार में पूरा लंड बाहर निकालता और फिर पूरा अन्दर डाल देता।
अब आंटी  पूरी तरह चुदाई में मस्त हो चुकी थीं.. वो मुझ पर अपने नाख़ून गड़ा कर इस तरह अपनी तरफ खींचती थीं.. जैसे वो मुझे भी अन्दर समा लेना चाहती हों.मैंने भी जोर से उन्हें भींच लिया और धक्के लगाने लगा. उन्होंने भी अपनी टाँगें ऊँची करके अपनी खुबसूरत टाँगें जकड़ दीं.

क्या बताऊँ दोस्तों . क्या गजब का अहसास था वो.. उनकी नर्म और सफेद दूध जैसी मस्त जाँघें मेरे चुतड़ों को दबा रही थीं और उनके चूचे मेरी छाती से इस तरह दबे थे कि अब उनके बीच हवा भी नहीं जा सकती थी.उनके बदन की और बगल के पसीने की खुश्बू तो कमाल की थी.
क्या कमाल का अहसास होता है.. जब किसी के प्यारे मम्मे आपके सीने से सटे हुए होते हैं।
मेरे लिए यह पहला अनुभव था.. तो मैं इतना उत्तेजित हो गया था कि मेरे लिए अपने आपको रोक पाना नामुमकिन था।

मैंने एक जोर का झटका लगाया और पूरा लंड  उनकी चुतरो की गहराइयों में उतार दिया और जोर से झड़ने लगा। 10  मिनट तक रुक-रुक कर झड़ता रहा।मझे खुद अपने आप पर आश्चर्य हो रहा था कि मैं इतना अधिक कैसे झड़ सकता हूँ.. पर दोस्तों कसम से झड़ने इतना मजा आया कि पूछो मत।आज से पहले कितनी ही दफा मुठ्ठ मार के झड़ा था.. पर जो मुझे आंटी के अन्दर  झड़ने में आया.. वो इससे पहले कभी नहीं आया। उस10  मिनट के लिए मानो मैं स्वर्ग में था। उस दौरान आंटी मुझसे अपनी जान भी मांगती.. तो मैं शायद दे देता।

आंटी  समझ गई थीं कि मैं झड़ रहा हूँ.. तो वो मुझे उस दौरान प्यार से मेरी पीठ सहला रही थी। झड़ने के बाद मैं निढाल हो गया और वैसे ही अपना सबकुछ डाले हुए उन पर पड़ा रहा और वो मुझे कुछ देर तक सहलाती रहीं।
थोड़ी देर बाद मेरी प्यारी आंटी  बोलीं- बस हो गया रोहन .. तू तो बहुत जल्दी शहीद हो गए।

मैंने प्यार से आंटी से कहा- आंटी आप हो ही इतनी सेक्सी कि कोई ज्यादा देर अपने आपको रोक ही नहीं सकता और मेरा तो ये पहली बार था।
इस पर आंटी ने कहा- वैसे रोहन तू भी कमाल की चुदाई करता है। मैंने आज तक ऐसी चुदाई का मज़ा नहीं लिया था। मुझे सही मायनों में आज पता चला कि चुदाई क्या होती है। अनिकेत का पिताजी भी कुछ ठीक ही चुदाई कर लेते हैं लेकिन आज तक उन्होंने ना ही कभी मेरे चुतरो को इतना प्यार से चाटी है ना ही इस तरह मुझे प्यार किया है। मुझे तो मालूम ही नहीं था कि कोई कभी इतना भी मुझे प्यार कर सकता है।

मैंने कहा- आपने कभी मुखमैथुन के बारे में नहीं सुना?
वो बोलीं- सुना तो है… लेकिन यकीन नहीं था कि कोई ऐसा भी कर सकता है।
मैंने कहा- वैसे आंटी .. मैंने भी कभी नहीं सोचा था कि मैं भी कभी इस तरह से चुतरो को चाटूंगा.. यह तो आपका ही कमाल है कि मैं पागल हो गया।

उन्होंने मुझे प्यार से सीचते हुए कहा- ऐसे पागल ही रहना मेरे नटखट रोहन ..
मैंने कहा- सच में आंटी .. आप कमाल की है.. क्या बताऊँ अप की  महक.. उसका स्वाद.. मस्त पाव रोटी जैसा उभार..
उन्होंने बीच में ही मुझे ‘बस.. बस..’ कहते हुए रोक दिया और अपने होंठ मेरे होंठ पर रखते हुए चूम लिया और अपनी बाँहों में कस लिया।

आपको याद दिला दूँ कि अभी भी मेरा बाबूराव उनकी चुनमुनिया के अन्दर ही था।
वो अचानक से बोलीं- भतीजे जी आपका बाबूराव तो काफी बड़ा लगता है.. जरा इसे दिखाओ तो सही।
ऐसा कहते हुए उन्होंने अपनी चुनमुनिया सिकोड़ दी और मेरे बाबूराव में एक झुनझुनाहट सी हो गई।

मित्रो.. जब मैं पहले मुठ्ठ मारता था.. तो उसके बाद मेरा बाबूराव फ़ौरन ही ढीला हो जाता था। लेकिन इस बार तो इतना झड़ने के बाद भी वो अब तक टाईट था जिसका मुझे आश्चर्य हुआ।
मैंने चाची को दिखाने के लिए अपना बाबूराव उनक चुनमुनिया से बाहर निकाला और उनके सामने खड़ा हो गया।
मेरा बाबूराव अब भी तना हुआ था.. जैसे उनका शुक्रिया अदा कर रहा हो।

चाची सोफे पर बैठ गईं अब उनका मुँह बिल्कुल मेरे बाबूराव के सामने था।
चाची उसे देख कर बोलीं- भतीजे जी, यह तो जैसे मुझे घूर रहा है।

मेरा बाबूराव पूरी तरह उनके रस और मेरे वीर्य से सना हुआ था और चमक रहा था। उधर चाची की चुनमुनिया से मेरा वीर्य रिस रहा था.. जो सोफे पर गिर रहा था।

मेरे बाबूराव को देखकर चाची बोलीं- आप का तो जितना सोचा था.. उससे काफी बड़ा है।
मैंने कहा- चाची आपकी चुनमुनिया से बड़ा नहीं है.. आपने तो इसे पूरा निगल लिया था।
वो हँसने लगीं और बोलीं- भतीजे जी चुनमुनिया से बड़ा तो कुछ भी नहीं होता.. न जाने कितने ही रजवाड़े इनमें घुसते चले गए।

उन्होंने मेरा बाबूराव अपने हाथ में पकड़ लिया.. जिससे मुझे अजीब सी झनझनाहट महसूस हुई और मेरे मुँह से ‘आह’ निकल गई।
चाची बोलीं- क्या हुआ भतीजे जी?
मैंने कहा- कुछ नहीं चाची.. आपके हाथ कमाल के हैं।

वो धीरे-धीरे मेरे बाबूराव को सहलाने लगीं। मुझे लगा कि वो चूसना चाहती थीं.. पर हिम्मत नहीं जुटा पा रही थीं। थोड़ी देर चाची के हाथों में रगड़ने के बाद मेरे बाबूराव की झनझनाहट कम हो गई और मैं फिर से चुदाई के मूड में आ गया।
मैंने चाची से कहा- चाची एक राउंड और हो जाए।
वो बोलीं- आज इतना ही.. बाकी फिर कभी..

तो मेरा सारा मूड खराब हो गया और मैंने मुँह लटका दिया।
इसे देखकर चाची बोलीं- लगता है भतीजे जी नाराज हो गए। और वे मुझे अपनी और खींचते हुए बोलीं- आ जाओ मेरे अन्दर मेरे चोदू भतीजे जी।
मैं इस पर खुश होकर चाची को सोफे पर गिरा कर उन पर चढ़ गया और जोर से उनको भींच लिया।

वो बोलीं- आराम से भतीजे जी.. मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूँ।
मैंने कहा- चाची.. आप हो ही इतनी प्यारी कि सब्र ही नहीं होता।
इस पर वो बोलीं- जब मैं आपको इशारा करती थी.. तब तो कुछ नहीं किया।

मैंने कहा- कब इशारा किया था आपने चाची?
इस पर वो बोलीं- टॉयलेट में क्या मैं यूँ ही अपनी चुनमुनिया रगड़ती थी और चौड़ी करके आपको दिखाती थी?
मैंने कहा- चाची मैं बुद्धू था.. तो मुझे कुछ समझ में नहीं आया।
वो बोलीं- खबरदार.. जो मेरे प्यारे भतीजे को बुद्धू कहा.. और मुझे जोर से भींच लिया।

मुझे उनका ये प्यार बहुत ही अच्छा लगा।
मैंने इस दौरान अपना बाबूराव उनकी चुनमुनिया पर रखा और अन्दर घुसेड़ दिया।
मेरे इस अचानक हमले से उनकी हल्की चीख निकल गई.. पर वो मस्त हो कर बोलीं- भतीजे जी आप तो बड़ी ही जल्दी अँधेरे में तीर चलाना सीख गए।

मैं अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गया और धक्के पर धक्के लगाने लगा, जिसे वो बड़े ही मजे से अपने अन्दर ले रही थीं।
मित्रो.. इस बार मैंने बड़े ही खुलकर उनको चोदा.. क्योंकि अब झड़ने का डर नहीं था।

इस बीच हम दोनों ने अपनी रसीली बातें चालू रखीं.. वो कभी-कभी मेरे चुतड़ों को थपकी मार दिया करती थीं.. तो मैं कभी उनके स्तनों को काट लेता और कभी उनके होंठों को काट लेता था।

वो बोलीं- भतीजे जी.. ये तो बताओ.. आप को मुझमें सबसे अच्छा क्या लगा.. ये तो बताओ?
मैंने कहा- आप पूरी की पूरी कमाल की हो।
वो बोलीं- ऐसे नहीं.. कुछ डिटेल में बताओ।

मैंने उनकी सुन्दरता के बारे में कहना शुरू किया।
मैंने कहा- आपका पूरा जिस्म.. आपके इस खुबसूरत चहेरे के आगे तो ऐश्वर्या भी कुछ नहीं।
वो बोलीं- सच में?
मैंने कहा- आपकी इस चुनमुनिया की कसम..

और मैंने एक जोर का धक्का मारा जिससे उनकी हल्की ‘आह’ निकल गई।
चाची बोलीं- और..
मैंने कहा- आपके ये मम्मे भी बड़े ही मस्त हैं.. ये दूध जैसे सफेद और रुई जैसे नर्म.. और उस पर ये काले निप्पल.. सच में किसी को भी पागल कर सकते हैं।
वो बोलीं- आप मर्दों की नजर ही वहाँ पर टिकी होती है.. कभी-कभी तो लगता है कि वो इन्हें खा ही जाएंगे।
मैंने कहा- ये चीज ही ऐसी है।

वो मुस्कुरा दीं।

मैंने कहा- सच बताऊँ तो आपकी खुश्बू कमाल की है।
वो बोलीं- कहाँ की खुश्बू.. ये तो बताओ?
मैंने एक और जोर का झटका उनकी चुनमुनिया में लगाया और कहा- यहाँ की।
उन्होंने एक ‘आह’ भरी और बोलीं- थोड़ा विस्तार से बताओ मेरे राजा।

मैं थोड़ा रुक गया और मैंने उनको देखा और चूमने लगा। मैं बड़े ही चाव से उनकी जीभ चूस रहा था और होंठ काट रहा था।
थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरी गान्ड पर एक थपकी लगाई और बोलीं- इसका काम चालू रखो.. ये रुकना नहीं चाहिए।
इस दौरान हमारी बाते चालू थीं.. मैंने आंटी से कहा- आपकी चुतर कमाल की है..
उन्होंने कहा- इसमें क्या कमाल है जैसी सबकी होती है वैसी मेरी है।
मैंने कहा- औरों की तो पता नहीं.. लेकिन आपकी चुतर की खुश्बू मुझे पागल कर देती है… मैंने ऐसी खुश्बू आज तक नहीं सूँघी।

वो बोलीं- कैसी है इसकी खुश्बू?मैंने कहा- इश की खुश्बू किसी भी चीज के साथ तुलना नहीं कर सकते.. उसकी अपनी एक अलग ही खुश्बू होती है। अगर कोई उसकी खुश्बू जैसी खुश्बू बना ले.. तो वो मालामाल हो जाएगा।

इस पर वो जोर से हँस पड़ीं और प्यार से मुझे चूमा और कहा- मेरा आशिक सच में पागल है.. पर ये तो बताओ कि इसका स्वाद कैसा लगा?
मैंने कहा- थोड़ा नमकीन.. थोड़ा खट्टा.. इसका भी खुश्बू जैसा ही है.. पूरी तरह किसी चीज से मैच नहीं करता।
वो मुस्कुराने लगीं।

मैंने आंटी से कहा- चुतर  एक यूनिक चीज है.. दुनिया में ऐसी कोई भी चीज नहीं..वो बोलीं- तभी तो पूरी दुनिया इसकी दीवानी है.. लेकिन अब तो ये मेरी चूत कहाँ रही.. आपने तो इसका भोसड़ा ही बना दिया।अब मैंने अपना मुँह उनके स्तनों पर लगाया और उनके दूध चूसने लगा। बीच-बीच में उनके निप्पल काट लेता था.. जिस पर वो मेरा सर अपने दूध पर दबा देती थीं।

आंटी  ने कहा- आप कमाल का चूसते हो.. अनिकेत के पापा को न चुतर चाटनी आती है न ही इन मस्त स्तनों को चूसना आता है… उन्होंने तो मेरे इतने साल यूं ही जाया कर दिए।मैंने कहा- आंटी.. अब आप फिकर न कीजिए.. मैं आपको इतना चोदूँगा कि आप पूरी तरह तृप्त हो जाएंगी।

आंटी  ने कहा- तृप्त तो मैं हो ही गई तुझसे रोहन ..
मैंने कहा- अभी कहाँ आपको तृप्त किया है..आंटी  ने कहा- और क्या बाकी रहा है अब?मैंने कहा- अभी तो बहुत कुछ बाकी है।
वो बोलीं- और क्या.. बताओ तो?

मैंने अपनी एक उंगली उनकी गान्ड के छेद में थोड़ा घुसेड़ कर कहा- अभी तो ये बाकी है।
उन्होंने कहा- खबरदार.. इसके बारे में सोचा भी तो..
मैंने हँस कर कहा- ओके..

थोड़ी देर बाद उन्होंने कहा- अब तक मैं 5 बार झड़ चुकी हूँ। इतना तो मैं सुहागरात के दिन भी नहीं झड़ी थी। तुमने तो मेरी चुतर  का कचूमर ही बना दिया है।मैंने कहा- कचूमर नहीं.. भोसड़ा..
वो बोलीं- हाँ.. वही यार..
मैंने मजाक में कहा- तो निकालूँ क्या?
उस पर उन्होंने मेरी गान्ड पर जोर से चपत लगाई और बोलीं- खबरदार जो इसे निकाला तो.. ये तो अब मेरा है।

मैंने एक जोर का झटका लगाया और कहा- और ये होल अब मेरी है.
वो बोलीं- बिल्कुल रोहन ..  जब जब तू चाहे.. इसकी बजा सकते है .
मैं इस बीच उनके दूध चूस रहा था और चुतर चोद रहा था.

वो बोलीं- जरा इसके बारे में तो कुछ बताओ।
मैंने कहा- आंटी आज पहली बार ही आपके मम्मे देखे और मुझे मिल भी गए.. इनका अहसास ही कुछ और है। ये थोड़े नर्म.. थोड़े सख्त हैं और सफ़ेद दूध पर ये काला निप्पल तो कमाल ही लगता है.. जैसे ऊपर वाले ने इसे बुरी नजर से बचाने के लिए ही लगा दिया हो।
औंटी मेरी बातें सुनकर बोलीं- तू बारा शायर और कबि जैसे बाते कर रहा है .
मैंने कहा- आप हो ही इतनी खूबसूरत कि कोई भी कवि बन जाए।

वो अपनी तारीफ सुन कर इतनी खुश हो गईं कि मुझे जोर से जकड़ लिया और बोलीं- ओह.. मेरे प्यारे चोदू.. मेरे बच्चे .. तू  मुझे पहले क्यों नहीं मिला।
अब वो अपनी चुतर में मेरे हर एक धक्के का मजा ले रही थीं। थोड़ी देर मैं यूं ही बिना कुछ बोले धक्के लगाता रहा।

फिर आंटी बोली कि तुम बहुत बड़े बदमाश हो, तुमने अपनी आंटी को पूरा गंदा कर दिया और फिर वो ज़ोर से हंसने लगी. फिर मैंने उनसे कहा कि आप भी इस में पूरा ज़िम्मेदार है, आंटी बोली कि ठीक है और फिर आंटी के घर से  सुबह के पांच बजे मई निकल आया और हम दोनों ने उस रात को तीन बार और सेक्स किया. आंटी और में रात भर पूरे नंगे रहे और पॉर्न फिल्म देखते रहे. दोस्तों अब भी आंटी और मुझे जब भी कोई अच्छा सा मौका मिलता है तो हम दोनों जमकर सेक्स करते है, लेकिन उससे ज़्यादा हम दोनों हमेशा फोन पर सेक्सी बातें करते है, आज तक यह सिलसिला चालू है.

धन्यबाद…………

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